शुक्रवार, 2 जनवरी 2026
एजुकेशन
पुरानी यादें
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पुरानी
यादें
दर्जी राम लुभाया जी
बहुत बंडियाँ कच्छे
जाट स्कूल रोहतक
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Dr G. S. Sekhon --My Teacher
टीचर्स डे के बहाने
प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका सूरजमुखी ने प्रभावित किया अपने खुशमिजाज व्यवहार से । हाई स्कूल के वक्त मेरे आदर्श टीचर रहे हैडमास्टर हरनंद राय जी और श्री देवी सिंह फिजिक्स के अध्यापक बहुत कुछ सीखने को मिला किताबी पढ़ाई के अलावा। प्री मेडिकल में कालेज के वक्त श्री हरिचंद हुड्डा । मेडिकल कालेज में प्रथम स्तर पर डॉ आई बी सिंह एनाटोमी विभाग से second profession के दौरान डॉ वासुदेवा एसपीएम विभाग और third प्रोफेशन में डॉ पी एस मैनी और डॉ उर्मिल कपूर gynae विभाग ने बहुत कुछ सिखाया। एम् एस सर्जरी के वक्त डॉ सूबेदार सिंह और डॉ जी एस सेखों ने मेरे जीवन को मानवीय बनाने में धीमे धीमे बहुत सी चीजें सिखाई। वक्त की कीमत और टाइम schedule की अहमियत । सिम्पलिसिटी। डॉ सेखों कहा करते "A good human being is always a good doctor ,but, not the vice versa .। गदूद के ऑपरेशन के टिप्स। आदि आदि। अपने विद्यार्थियों से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। जनतांत्रिक प्रणाली से टीम के साथ काम करना आसान नहीं होता । शायद ही ऐसा कोई मौका होगा की राउंड के वक्त जूनियर्स पर गुस्सा किया हो या किसी नर्स पर डाँट लगाई हो। खास बात जो सामने आयी वो थी की इस प्रणाली से ओपीडी और दाखिल हुए मरीजों का सबसे ज्यादा विश्वास जीत पाते थे। सीखना सीखाना bilateral process बनता है तो टीचर और स्टूडेंट का बहुत अलग रिस्ता बनता है । अपने सभी शिक्षकों को याद करते हुए और उन विद्यार्थियों को भी याद करते हुए जिनसे भी बहुत कुछ सीखा।
रणबीर
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दूसरी से पांचवी क्लास जाट प्राइमरी स्कूल रोहतक से पास की। मास्टर जी फतेह सिंह दलाल शुरू में फिर साथ में सूरजमुखी बहिनजी, बाद में मास्टर जी दलजीत सिंह राठी भी गुरुजन थे।
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Some of us still remember the torturing days of strike in Medical College Rohtak for 98 days in the year 1977. The dividion on strikers and non strikers was on extreeme caste based .PGIMS Suffered a lot in post strike period. More or less the same type of caste dirty play is active on the campus again . We should be careful about this . Our main and real issues then take back seat .
The time we went on the longest strike in the medical colleges' history(1978)!! Ved Pal Mehla
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पुराणी यादें
MBBS के बाद इंटर्नशिप कर रहे थे । 3 महीने की रूरल पोस्टिंग बेरी में थी । SPM विभाग की तरफ से 10 दिन का हेल्थ कैम्प जहाजगढ़ माजरा में लगा। सर्जरी विभाग से सीनियर सर्जन डॉक्टर छाबड़ा की ड्यूटी थी । मेरी ड्यूटी भी सर्जरी सेक्सन में थी । पहले 3 दिन सुबह OPD और शाम को सर्जरी होती। एक दिन शायद बदलू राम का मरीज गर्दन के पिछले हिस्से (Nape of neck) में एक काफी बड़ी गाँठ लेकर आया। उसका diagnosis लाइपोमा(lipoma) बना। शाम को 7 बजे ऑपरेशन शुरू किया। डॉक्टर बलबीर छाबड़ा बेहोशी विभाग से थे ।
पौने घंटे से ज्यादा हो गया । खून ज्यादा बाह गया। गाँठ निकल नहीं पा रही थी । दो यूनिट खून की जरूरत पड़ी। लैब तकनीशियन नहीं मिला। ताला तोड़कर सिट्रेट निकाला और मरीज का सैम्पल लिया । spm deptt के पास एक ट्रक था उस वक्त वाही था। driver जय नारायण था और शाम को बरसात भी तगड़ी हुई थी । गांगटांन गाँव से परली तरफ सड़क पर काफी दूर तक पानी था ।मैंने जय नारायण को कहा कि फुल स्पीड से ट्रक चला मरीज का बचाना बहुत जरूरी है हमें अपनी जान की परवाह नहीं करनी है ।
फुल स्पीड से चलाया। रोहतक पहुंचे । डॉक्टर एल सी गुप्ता को घर से लिया और दो यूनिट ब्लड लेकर हम 1.5 घंटे में जहाजगढ़ माजरा वापिस थे । सब हैरान थे । ऑपरेशन हो चूका था। खून बहुत बह गया था। खून चढ़ाया गया। बदलूराम बच गया। मैंने जयनारायण का बहुत बहुत धन्यवाद किया। Biopsy Report में sarcoma (एक तरह का कैंसर आया) । बाकि इलाज मेडिकल में चला और कई साल जिया बदलू राम ।
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पुरानी यादें --
1976 -1977 का दौर
मेरी पोस्टिंग spm deptt की तरफ से सिविल अस्पताल बेरी में कर दी गई। सिविल अस्पताल के अलावा लेडीज का विंग भी था बाजार के अंदर जा कर । उसमें एक बुजुर्ग महिला फार्मासिस्ट की पोस्टिंग थी। designation दूसरा भी हो सकता है । वहां से सन्देश आया शाम के वक्त कि एक मुश्किल डिलीवरी है और डॉक्टर साहब को बुलाया है। मैं सोचता जा रहा था कि डेढ़ महीने की maternity ड्यूटी में 5 या 6 डिलीवरी देखी थी। सोचते सोचते पहुंच कर देखा कि breech डिलीवरी थी। monaster था। चार टांगे , चार बाजू , धड़ एक और दो सिर वाला। चारों टांगे और दो बाजू डिलीवर हो चुकी थी। देख कर पसीने छूट गए। एक मिनट सोचा कि मेडिकल भेज दिया जाए। फिर सोचा इस हालत में कैसे भेजेंगे? अगले ही पल सोचा कोशिश करते हैं । मन ही मन Dr GS Sekhon मेरे बॉस याद आ गए। वे कहते थे कि कितना भी मुश्किल मामला हो अपनी कॉमन सैंस को मत भूलो और पक्के निश्चय के साथ शांत भाव से जुट जाओ । जुट गया । जल्दी लोकल लगाकर episiotomy incision दिया और निरीक्षण किया। महिला का हौंसला बढ़ाया। बाकी के दो बाजू डिलीवर करने में 15 मिन्ट लगे । पसीने छूट रहे थे । खैर फिर मुश्किल से एक सिर और डिलीवर करवाया। फिर भी कुछ बाकी था । देखा अच्छी तरह तो एक सिर अभी बाकी था और पहले वाले सिर से कुछ बड़ा था । कोशिश की । episiotomy incision को extend किया । 15 से 20 मिन्ट की मश्शक्त के बाद दूसरा सिर भी डिलीवर हो गया । monaster था डेथ हो चुकी थी। मगर हम महिला को बचा पाए। पता लगता गया कि दो सिर चार बाजू चार टांगो वाला बच्चा पैदा हुआ है । कौतूहल वश बहुत लोग इकट्ठे हो गए थे। 6 महीने के बाद वापिस spm deptt में आ गया । 2-3 साल के बाद एक हैंड प्रोलैप्स का केस रेफ़ेर हुआ मेडिकल के लिए । रहडू पर लिटा कर बाजार के बीच से ले जा रहे थे तो किसी ने पूछा के बात कहां ले जा रहे हो। बताया कि एक हाथ बाहर आ गया । मेडिकल ले जा रहे हैं । तो अनजाने में उस बुजुर्ग ने कहा - एक बख्त वो था जिब चार चार हाथां आले की डिलीवरी करवा दी थी, आज एक हाथ काबू कोनी आया। किसी ने बताया था जब वह मरीज मेरे पास 6 वार्ड में दाखिल था । मेरे को मेरे बॉस Dr सेखों एक बार फिर याद आये। बहुत अलग किस्म की इंसानियत के धनी थे Dr सेखों।
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पुरानी यादें
24 -25 साल पहले की बात है । नार्थ जोन सर्जन कांफ्रेंस जम्मू में आयोजित की गई थी । रोहतक से 25-30 डॉक्टर थे । एक दिन सभी का मन वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा का बना। मैने मना किया तो सभी ने अनुरोध किया कि चलें । हम चल दिये ।
अर्ध कन्वारी से कुछ पहले 4-5 महिलाएं और 5-6 पुरुष परेशान से दिखाई दे रहे थे। हमारे में से किसी ने पूछा-क्या बात है क्या हुआ।
बताया- उनके एक बुजुर्ग पेशाब करने बैठे थे और वे नीचे खाई में लुढ़क गए हैं । उन्हें देखने गए हैं।
हमने भी बुजुर्ग को ढूंढने की इच्छा बनाई और 5-6 डॉक्टर हम नीचे उतरते चले गए । 150 गज के करीब नीचे उतरने के बाद हमने आवाज लगाई कि क्या बुजुर्ग मिल गए। और नीचे से आवाज आई- हाँ मिल गए। हमने पूछा- कैसी तबियत है? जवाब आया- ठीक हैं। उप्पर रास्ते में खड़े लोगों ने सुना तो कुछ जय माता की बोलते चले गए।
हमने फिर पूछा कि हम डॉक्टर हैं कोई चोट है तो हम आ जाते हैं मदद करने । बताओ कहाँ पर हो।
फिर आवाज आई थोड़ी धीमी - वो तो चल बसे । इतनी देर में हम भी वहां पहुंच गए थे। पूछा- पहले ठीक क्यों कहा ? जवाब था कि ऊपर वाले रिश्तेदारों में से किसी को सदमा न लग जाये इसलिए ।
कुछ लोगों को तो लगा कि माता ने उस बुजुर्ग को बचा लिया। मगर सच्चाई यही थी कि माता उस बुजुर्ग को नहीं बचा पाई।
मैने सभी डॉक्टर सहयोगियों से पूछा -- यदि बुजुर्ग जिंदा होते और चोटिल होते तो हम क्या फर्स्ट एड कर सकते थे । सब ने अपने अपने ढंग से बात रखी। मैने फिर कहा- बिना इमरजेंसी किट के शायद हम ज्यादा फर्स्ट एड करने की हालत में नहीं होते।
हम सबने तय किया कि जब इस तरह के ग्रुप में कहीं जाएंगे तो इमरजेंसी किट जरूर साथ लेकर चलेंगे ।
बाकियों का तो पता नहीं मैने एक किट जरूर बना ली ।
तीन साल बाद वही कांफ्रेंस पी जी आई चंडीगढ़ में थी। कालेज की बस में गए थे हम सब । वापसी पर अम्बाला पहुंचने से पहले हमारे सामने ट्रैक्टर सड़क के किनारे पलट गया। हमने गाड़ी रुकवाई ।
ड्राइवर ट्रैक्टर के पहिये के नीचे दबा था । हमने सबने मिलकर उसको निकाला और देखा तो वह शॉक में था । मैं ने इमरजेंसी किट से उसे मेफेंटीन इंजेक्शन दिया और एक वोवरान का inj दिया । कुछ संम्भल गया मरीज । हमने उसे अपनी गाड़ी में लिटाया और उसे अम्बाला सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया । इलाज शुरू हुआ तो मरीज और इम्प्रूव हुआ ।
3 साल तक लगता था यह किट खामखा उठाये फिरता हूँ मगर उस रोज लगा कि खामखा नहीं उठाई किट ।
शायद जो डॉक्टर साथी इन दोनों मौकों पर थे उनको याद हों ये दोनों घटनाएं ।
रणबीर दहिया
9812139001
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डॉ सुरेश शर्मा - पानीपत की चौथी लड़ाई
डा सूरजभान
राजेश अत्रेय
डा शंकर इसराना
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पुरानी यादें --मेरे बॉस डॉ सेखों
1976 -1977 का दौर
मेरी पोस्टिंग spm deptt की तरफ से सिविल अस्पताल बेरी में कर दी गई। सिविल अस्पताल के अलावा लेडीज का विंग भी था बाजार के अंदर जा कर । उसमें एक बुजुर्ग महिला फार्मासिस्ट की पोस्टिंग थी। designation दूसरा भी हो सकता है । वहां से सन्देश आया शाम के वक्त कि एक मुश्किल डिलीवरी है और डॉक्टर साहब को बुलाया है। मैं सोचता जा रहा था कि डेढ़ महीने की maternity ड्यूटी में 5 या 6 डिलीवरी देखी थी। सोचते सोचते पहुंच कर देखा कि breech डिलीवरी थी। monaster था। चार टांगे , चार बाजू , धड़ एक और दो सिर वाला। चारों टांगे और दो बाजू डिलीवर हो चुकी थी। देख कर पसीने छूट गए। एक मिनट सोचा कि मेडिकल भेज दिया जाए। फिर सोचा इस हालत में कैसे भेजेंगे? अगले ही पल सोचा कोशिश करते हैं । मन ही मन Dr GS Sekhon मेरे बॉस याद आ गए। वे कहते थे कि कितना भी मुश्किल मामला हो अपनी कॉमन सैंस को मत भूलो और पक्के निश्चय के साथ शांत भाव से जुट जाओ । जुट गया । जल्दी लोकल लगाकर episiotomy incision दिया और निरीक्षण किया। महिला का हौंसला बढ़ाया। बाकी के दो बाजू डिलीवर करने में 15 मिन्ट लगे । पसीने छूट रहे थे । खैर फिर मुश्किल से एक सिर और डिलीवर करवाया। फिर भी कुछ बाकी था । देखा अच्छी तरह तो एक सिर अभी बाकी था और पहले वाले सिर से कुछ बड़ा था । कोशिश की । episiotomy incision को extend किया । 15 से 20 मिन्ट की मश्शक्त के बाद दूसरा सिर भी डिलीवर हो गया । monaster था डेथ हो चुकी थी। मगर हम महिला को बचा पाए। पता लगता गया कि दो सिर चार बाजू चार टांगो वाला बच्चा पैदा हुआ है । कौतूहल वश बहुत लोग इकट्ठे हो गए थे। 6 महीने के बाद वापिस spm deptt में आ गया । 2-3 साल के बाद एक हैंड प्रोलैप्स का केस रेफ़ेर हुआ मेडिकल के लिए । रहडू पर लिटा कर बाजार के बीच से ले जा रहे थे तो किसी ने पूछा के बात कहां ले जा रहे हो। बताया कि एक हाथ बाहर आ गया । मेडिकल ले जा रहे हैं । तो अनजाने में उस बुजुर्ग ने कहा - एक बख्त वो था जिब चार चार हाथां आले की डिलीवरी करवा दी थी, आज एक हाथ काबू कोनी आया। किसी ने बताया था जब वह मरीज मेरे पास 6 वार्ड में दाखिल था । मेरे को मेरे बॉस Dr सेखों एक बार फिर याद आये। बहुत अलग किस्म की इंसानियत के धनी थे Dr सेखों।
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आज किशनपुरा चौपाल में सुश्री उर्मिला जी भूतपूर्व सरपंच गांगटान और साक्षरता आंदोलन की अग्रणी कार्यकर्ता से मुलाकात हुई। पुरानी यादें उस दौर की सांझा की। बहुत अच्छा लगा । उनके साथ दो महिलाएं अपने स्वाथ्य के बारे परामर्श करने आई थी।
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2014 अगस्त में रिटायरमेंट के टाइम पूरी यूनिट के डॉक्टर एक साथ अपनी पुरानी यादें, पुराने दुख सुख के दिन जो यूनिट में गुजरे थे उन्हें अपने अपने ढंग से याद कर रहे थे। एक सीनियर एस आर ने बताया कि एक बार एक unkown मरीज एक्सीडेंट के साथ आया । उसके पेट में चोट थी। उसको ऑपरेट करने की जरूरत थी मगर उसके ग्रुप का खून ब्लड बैंक में नहीं था । बताया कि सर आपका o पॉजिटिव ब्लड है जो पॉजिटिव दूसरे सभी ग्रुप्स को दिया जा सकता है। आप ब्लड बैंक गए वहां एक यूनिट ब्लड unkown मरीज के लिए दिया और वापिस आकर उसका आपरेशन किया। मरीज बचा लिया गया।
मैने बहुत कोशिश की पुरानी याद को याद करने की । मगर जब डेट आदि बताई तो मुझे भी यकीन हुआ कि ऐसा कुछ हुआ था।
और भी कई ना भुलाई जाने वाली पुरानी यादें साझा की गई। अब थोड़ा उम्र का असर होने लगा है तो सोचा सांझा कर लूँ सभी के साथ। मौके पर लिया गया फैंसला यदि एक ज्यान को भी बचा पाता है एक डॉक्टर के जीवन में तो एक एहसास और विश्वास बढ़ता है डॉक्टर का।
मेरे साथ के हमसफ़र सभी डॉक्टरों को याद करते हुए | मुझे गर्व है अपनी यूनिट के उन सभी डॉक्टरों पर जो मरीजों की सेवा में लग्न हैं।
डॉ रणबीर
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'पानीपत की चौथी लड़ाई' साक्षरता आंदोलन की 1992 की रैली।
***पुरानी यादें***
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Dr O.P.Grewal
पन्द्राह साल हो लिए वे चले गए हमनै छोड़कै।।
उनहत्तर साल बिताए ज्ञान विज्ञान मैं जी तोड़कै।।
डॉ ओम प्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान की जनरल बॉडी मीटिंग में हिस्सेदारी करने का मौका मिला। बहुत सी पुरानी यादें भी ताजा हो गई। डॉ ग्रेवाल के व्यक्तित्व बारे कहने को शब्द नहीं हैं मेरे पास। बहुत ही उत्साहवर्धक मीटिंग रही।
6.6.1937.....24.1.2006
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पुरानी यादें---
मंत्री खुर्सीद अहमद जी :
खेल प्रतियोगिता इनाम वितरण समारोह मेडिकल कॉलेज रोहतक सन 1971 के आस पास ।
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डा• कृष्णा सांगवान,डा• सरोज मुदगिल,डा• सुखबीर सांगवान,डा• रणबीर सिंह दहिया,डा• रणबीर हुड्डा,डा• श्रीराम सिवाच ,डा• मुकेश इन्दौरा ,डा• कोहली।
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पुरानी यादें -- डॉ विकाश कथूरिया, डॉ विकास अग्रवाल, डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ सुनील , डॉ पूजा , डॉ कुलदीप, डॉ राजू राजन, डॉ दीपांशु और सभी कॉलीग्स -- आप सबको सलाम ।
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सिरसली स्वर्गीय संतोष के पोते की शादी में -20 अप्रैल, 2022.पुरानी यादें ताजा हो गई। चम्पा सिंह जी भी मिले।
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आज नित्यानंद स्कूल गया सप्तरंग के प्रोग्राम में तो प्रोफेसर जय सिंह मलिक का फोटो नजर आया। देखकर पुरानी यादें ताजा हो गई। बहुत ही नेक दिल इंसान और दोस्त ।
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समस्त कर्मचारी व छात्र पीजीआईएमएस रोहतक द्वारा बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के 131वें जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम ।
पीजीआईएमएस,रोहतक लेक्चर थिएटर -1 में।
इस 1 थियेटर में कभी 1967से 1971के दौर में अपने गुरुओं से पढ़ा और बहुत कुछ सीखा और फिर 1983 से 2014 तक पढ़ाया भी। बहुत सी पुरानी यादें ताजा हो गयी। (42 साल का सफर)
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हरियाणा के प्रथम साक्षरता अभियान, जो कि पानीपत जिले में चला था, उस अभियान के एक परोधा डॉ. रणबीर सिंह दहिया (पी.जी.आई.एम.एस. के सेवानिवृत्त प्रोफेसर) को जिला विकास भवन में आयोजित हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यक्रम में सुनने का मौका मिला। सचमुच आज भी युवाओं जैसा जोश हैं डॉ. दहिया में।
इसी कार्यक्रम में कुछ फलैक्स पर मेरे द्वारा विज्ञान लोकप्रियकरण एवं अंधविश्वासों के खिलाफ लिखे लेख और कुछ रिपोर्ट भी छपी हुई थी। पुरानी यादे ताजा हो गई। धन्यवाद, हरियाणा विज्ञान मंच का।
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आज बहुत दिनों बाद एनोटमी विभाग के लेक्चर थिएटर वन में 2 घण्टे के लिए जाने का मौका मिला । 1967 कि यादें ताजा हो गई । पुरानी यादें ; पुराने अध्यापक : डॉ इंदरजीत दीवान, डॉ इंद्रबीर सिंह , डॉ छिबर, डॉ गांधी, डॉ राठी याद आ गए। 67 बैच के साथी भी दिमाग में घूम गए । सुशील खुराना, आर एन कालरा, अशोक भाटिया, दयासागर गोयल, हरीश भंडारी , रमेश मित्तल, ईश्वर नासिर, रीटा गुलाटी, कर्मजीत कौर, कृष्णा सहरावत , स्वर्ण लता, विमला कादयान आदि आदि।
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कल भिवानी में डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ शिव शंकर भारद्वाज , डॉ ईश्वर दास और डॉ त्रिलोकी गुप्ता से मिलने का और पूरानी यादें ताजा करने का मौका मिला और भरपूर सहयोग मिला ।
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795 पिल्लर(टिकरी बॉर्डर) पर जन स्वास्थ्य अभियान द्वारा 1 साल किसानों के लिए फ्री हेल्थ कैम्प का आयोजन । आज वहां से गुजरने का मौका मिला तो पुरानी यादें ताजा हो गयी तो यह वीडियो बना लिया।
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भुली बिसरी यादें
सन 1956 की बात है की मेरे पिताजी चौधरी जागे राम सिरसा से बतोर इंस्पेक्टर एग्रीकल्चर की पोस्ट से बतौर फार्म मैनेजर सरकारी एग्रीकल्चर फार्म रोहतक में तबादला हो कर आए। यह फार्म 100 एकड़ जमीन में बना सरकारी एग्रीकल्चर फार्म था , जिसमें हर तरह की खेती की जाती थी । चार जोड़ी हट्टे कट्टे बैल थे जो खेती करने में बहुत कारगर रूप से इस्तेमाल किए जाते थे । पिताजी 1966 तक यहां पर रहे और यहीं से रिटायर हो गए। आने वाले दिनों में यह फार्म नहीं रहा और जमीन कुछ बेच दी गई कुछ पर सरकारी दफ्तर खुलते गए और सरकारी अफसरों के रहने के लिये कोठियां और मकान बनते गए। सिरफ़ एग्रीकल्चर फार्म का मेन गेट बचा है जो कमिश्नर के रेजिडेंस और दफ्तर दोनों यहां हैं, तक जाता है बाकि एग्रो मॉल इसकी जमीन में बना और कई कॉलोनी भी बन गई । बहुत से मकान हैं । दो पीपल के पेड़ आज भी पहचाने जा सकते हैं जो हमारे घर के सामने मौजूद थे। भूली बिसरी यादें हैं पूरे फॉर्म में घूमते थे। पिताजी बहुत सख्त मिजाज थे और फार्म के खेत से चूसने के लिए गन्ने भी नहीं लाने देते थे। बोहर वालों के खेतों से लेकर आते थे। और चीजों का तो मतलब ही नहीं । यहीं से मैं बिल्कुल साथ लगता जाट स्कूल है वहां पर पढ़ने जाने लगा । पहले प्राइमरी स्कूल में पढ़ा और फिर हाई स्कूल में छठी क्लास से हायर सेकेंडरी किया । बहुत सी यादें हैं उस दौर की जिन्हें याद करना इतना आसान नहीं है आज एक बार कोशिश है उन पुरानी यादों को याद करने की।
प्राइमरी स्कूल में पहले एक ही टीचर थे मास्टर फतेह सिंह दलाल। तीसरी में हुए तो सूरजमुखी बहिनजी ने भी ज्वाइन कर लिया। पांचवी तक पहुंचे तो मास्टर दलजीत सिंह राठी जी भी क्लास लेने लगे।
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भूली बिसरी यादें
1978 में मेडिकल रोहतक में 98 दिन की हड़ताल हुई..उन दिनों चौधरी हरद्वारी लाल वाईस चांसलर थे। मेरे जीवन में बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई यह हड़ताल।
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वार्ड 6-- भूली बिसरी यादें
एक बार की बात की झरौट के बुजुर्ग अपनी घरवाली को लेकर आये । उसकी एक टांग में गैंग्रीन हो गई बायीं या दायीं याद नहीं। हमने सभी concerned विभागों की राय ली और यह तय हुआ कि amputation करनी होगी । ताऊ को समझाया। कटने की बात सुनकर दोनों घबरा गए । ताऊ मेरे कमरे में आया और हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया। मैने बिठाया और उसकी और देखा। " काटनी ए पड़ैगी डॉ साहब। और कोए राह कोण्या इसकी ज्यान नै खतरा करदेगी या गैंग्रीन -- मैंने जवाब दिया बहुत धीमे से। ताऊ बोल्या-- न्यों कहवै सैं अक गुड़गांव मैं शीतला माता की धोक मारकै ठीक होज्यां हैं। मैंने कहा-- मेरी जानकारी में नहीं। ताऊ-- एक बार जाना चाहवैं सैं। फेर आपके डॉ न्यों बोले-- LAMA होज्या । छुट्टी कोण्या देवें । और फिर हमारे वार्ड में दाखिला नहीं हो सकता। चाहूँ सू आप के वार्ड मैं इलाज करवाना। मैने कहा एक शर्त है-- जै इसकी टांग धोक मारकै ठीक होज्या तो भी लियाईये और नहीं ठीक हो तो भी। ठीक होगी तो मैं बाकी के इसे मरीज भी वहीं गुड़गांव भेज दिया करूंगा और ठीक न हो तो आप ये सारी बात एक पर्चे में लिखकर बांटना कि वहां मेरी घरवाली ठीक नहीं हुई। हम ने discharge on request कर दिया । दो दिन बाद वापिस आ गया । महिला की हालत ज्यादा खराब हुई थी। खैर amputation ortho विभाग के सहयोग से की और महिला ठीक होकर चली गयी । बुजुर्ग जाने से पहले आया कमरे में और कहने लगा-- पर्चा छापना चाहूँ सूँ फेर गांव वाले कह रहे हैं शीतला माता
के खिलाफ पर्चा। बहोत दबाव सै मेरे पै डॉ साहब । पैरों की तरफ हाथ किये । मैने बुजुर्ग को छाती से लगा लिया और आशीर्वाद देने को कहा।
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भुली बिसरी यादें -- मेडिकल कालेज वार्षिक खेल आयोजन--2012
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समस्त कर्मचारी व छात्र पीजीआईएमएस रोहतक द्वारा बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के 131वें जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम ।
पीजीआईएमएस,रोहतक लेक्चर थिएटर -1 में।
इस 1 थियेटर में कभी 1967से 1971के दौर में अपने गुरुओं से पढ़ा और बहुत कुछ सीखा और फिर 1983 से 2014 तक पढ़ाया भी। बहुत सी पुरानी यादें ताजा हो गयी। (42 साल का सफर)
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हरियाणा के प्रथम साक्षरता अभियान, जो कि पानीपत जिले में चला था, उस अभियान के एक परोधा डॉ. रणबीर सिंह दहिया (पी.जी.आई.एम.एस. के सेवानिवृत्त प्रोफेसर) को जिला विकास भवन में आयोजित हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यक्रम में सुनने का मौका मिला। सचमुच आज भी युवाओं जैसा जोश हैं डॉ. दहिया में।
इसी कार्यक्रम में कुछ फलैक्स पर मेरे द्वारा विज्ञान लोकप्रियकरण एवं अंधविश्वासों के खिलाफ लिखे लेख और कुछ रिपोर्ट भी छपी हुई थी। पुरानी यादे ताजा हो गई। धन्यवाद, हरियाणा विज्ञान मंच का।
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कल भिवानी में डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ शिव शंकर भारद्वाज , डॉ ईश्वर दास और डॉ त्रिलोकी गुप्ता से मिलने का और पूरानी यादें ताजा करने का मौका मिला और भरपूर सहयोग मिला ।
जनवरी 2017
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पुराणी यादें
MBBS के बाद इंटर्नशिप कर रहे थे । 3 महीने की रूरल पोस्टिंग बेरी में थी । SPM विभाग की तरफ से 10 दिन का हेल्थ कैम्प जहाजगढ़ माजरा में लगा। सर्जरी विभाग से सीनियर सर्जन डॉक्टर छाबड़ा की ड्यूटी थी । मेरी ड्यूटी भी सर्जरी सेक्सन में थी । पहले 3 दिन सुबह OPD और शाम को सर्जरी होती। एक दिन शायद बदलू राम का मरीज गर्दन के पिछले हिस्से (Nape of neck) में एक काफी बड़ी गाँठ लेकर आया। उसका diagnosis लाइपोमा(lipoma) बना। शाम को 7 बजे ऑपरेशन शुरू किया। डॉक्टर बलबीर छाबड़ा बेहोशी विभाग से थे ।
पौने घंटे से ज्यादा हो गया । खून ज्यादा बाह गया। गाँठ निकल नहीं पा रही थी । दो यूनिट खून की जरूरत पड़ी। लैब तकनीशियन नहीं मिला। ताला तोड़कर सिट्रेट निकाला और मरीज का सैम्पल लिया । spm deptt के पास एक ट्रक था उस वक्त वाही था। driver जय नारायण था और शाम को बरसात भी तगड़ी हुई थी । गांगटांन गाँव से परली तरफ सड़क पर काफी दूर तक पानी था ।मैंने जय नारायण को कहा कि फुल स्पीड से ट्रक चला मरीज का बचाना बहुत जरूरी है हमें अपनी जान की परवाह नहीं करनी है ।
फुल स्पीड से चलाया। रोहतक पहुंचे । डॉक्टर एल सी गुप्ता को घर से लिया और दो यूनिट ब्लड लेकर हम 1.5 घंटे में जहाजगढ़ माजरा वापिस थे । सब हैरान थे । ऑपरेशन हो चूका था। खून बहुत बह गया था। खून चढ़ाया गया। बदलूराम बच गया। मैंने जयनारायण का बहुत बहुत धन्यवाद किया। Biopsy Report में sarcoma (एक तरह का कैंसर आया) । बाकि इलाज मेडिकल में चला और कई साल जिया बदलू राम ।
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पुरानी
यादें
दर्जी राम लुभाया जी
बहुत बंडियाँ कच्छे
जाट स्कूल रोहतक
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Dr G. S. Sekhon --My Teacher
टीचर्स डे के बहाने
प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका सूरजमुखी ने प्रभावित किया अपने खुशमिजाज व्यवहार से । हाई स्कूल के वक्त मेरे आदर्श टीचर रहे हैडमास्टर हरनंद राय जी और श्री देवी सिंह फिजिक्स के अध्यापक बहुत कुछ सीखने को मिला किताबी पढ़ाई के अलावा। प्री मेडिकल में कालेज के वक्त श्री हरिचंद हुड्डा । मेडिकल कालेज में प्रथम स्तर पर डॉ आई बी सिंह एनाटोमी विभाग से second profession के दौरान डॉ वासुदेवा एसपीएम विभाग और third प्रोफेशन में डॉ पी एस मैनी और डॉ उर्मिल कपूर gynae विभाग ने बहुत कुछ सिखाया। एम् एस सर्जरी के वक्त डॉ सूबेदार सिंह और डॉ जी एस सेखों ने मेरे जीवन को मानवीय बनाने में धीमे धीमे बहुत सी चीजें सिखाई। वक्त की कीमत और टाइम schedule की अहमियत । सिम्पलिसिटी। डॉ सेखों कहा करते "A good human being is always a good doctor ,but, not the vice versa .। गदूद के ऑपरेशन के टिप्स। आदि आदि। अपने विद्यार्थियों से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। जनतांत्रिक प्रणाली से टीम के साथ काम करना आसान नहीं होता । शायद ही ऐसा कोई मौका होगा की राउंड के वक्त जूनियर्स पर गुस्सा किया हो या किसी नर्स पर डाँट लगाई हो। खास बात जो सामने आयी वो थी की इस प्रणाली से ओपीडी और दाखिल हुए मरीजों का सबसे ज्यादा विश्वास जीत पाते थे। सीखना सीखाना bilateral process बनता है तो टीचर और स्टूडेंट का बहुत अलग रिस्ता बनता है । अपने सभी शिक्षकों को याद करते हुए और उन विद्यार्थियों को भी याद करते हुए जिनसे भी बहुत कुछ सीखा।
रणबीर
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दूसरी से पांचवी क्लास जाट प्राइमरी स्कूल रोहतक से पास की। मास्टर जी फतेह सिंह दलाल शुरू में फिर साथ में सूरजमुखी बहिनजी, बाद में मास्टर जी दलजीत सिंह राठी भी गुरुजन थे।
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Some of us still remember the torturing days of strike in Medical College Rohtak for 98 days in the year 1977. The dividion on strikers and non strikers was on extreeme caste based .PGIMS Suffered a lot in post strike period. More or less the same type of caste dirty play is active on the campus again . We should be careful about this . Our main and real issues then take back seat .
The time we went on the longest strike in the medical colleges' history(1978)!! Ved Pal Mehla
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पुराणी यादें
MBBS के बाद इंटर्नशिप कर रहे थे । 3 महीने की रूरल पोस्टिंग बेरी में थी । SPM विभाग की तरफ से 10 दिन का हेल्थ कैम्प जहाजगढ़ माजरा में लगा। सर्जरी विभाग से सीनियर सर्जन डॉक्टर छाबड़ा की ड्यूटी थी । मेरी ड्यूटी भी सर्जरी सेक्सन में थी । पहले 3 दिन सुबह OPD और शाम को सर्जरी होती। एक दिन शायद बदलू राम का मरीज गर्दन के पिछले हिस्से (Nape of neck) में एक काफी बड़ी गाँठ लेकर आया। उसका diagnosis लाइपोमा(lipoma) बना। शाम को 7 बजे ऑपरेशन शुरू किया। डॉक्टर बलबीर छाबड़ा बेहोशी विभाग से थे ।
पौने घंटे से ज्यादा हो गया । खून ज्यादा बाह गया। गाँठ निकल नहीं पा रही थी । दो यूनिट खून की जरूरत पड़ी। लैब तकनीशियन नहीं मिला। ताला तोड़कर सिट्रेट निकाला और मरीज का सैम्पल लिया । spm deptt के पास एक ट्रक था उस वक्त वाही था। driver जय नारायण था और शाम को बरसात भी तगड़ी हुई थी । गांगटांन गाँव से परली तरफ सड़क पर काफी दूर तक पानी था ।मैंने जय नारायण को कहा कि फुल स्पीड से ट्रक चला मरीज का बचाना बहुत जरूरी है हमें अपनी जान की परवाह नहीं करनी है ।
फुल स्पीड से चलाया। रोहतक पहुंचे । डॉक्टर एल सी गुप्ता को घर से लिया और दो यूनिट ब्लड लेकर हम 1.5 घंटे में जहाजगढ़ माजरा वापिस थे । सब हैरान थे । ऑपरेशन हो चूका था। खून बहुत बह गया था। खून चढ़ाया गया। बदलूराम बच गया। मैंने जयनारायण का बहुत बहुत धन्यवाद किया। Biopsy Report में sarcoma (एक तरह का कैंसर आया) । बाकि इलाज मेडिकल में चला और कई साल जिया बदलू राम ।
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पुरानी यादें --
1976 -1977 का दौर
मेरी पोस्टिंग spm deptt की तरफ से सिविल अस्पताल बेरी में कर दी गई। सिविल अस्पताल के अलावा लेडीज का विंग भी था बाजार के अंदर जा कर । उसमें एक बुजुर्ग महिला फार्मासिस्ट की पोस्टिंग थी। designation दूसरा भी हो सकता है । वहां से सन्देश आया शाम के वक्त कि एक मुश्किल डिलीवरी है और डॉक्टर साहब को बुलाया है। मैं सोचता जा रहा था कि डेढ़ महीने की maternity ड्यूटी में 5 या 6 डिलीवरी देखी थी। सोचते सोचते पहुंच कर देखा कि breech डिलीवरी थी। monaster था। चार टांगे , चार बाजू , धड़ एक और दो सिर वाला। चारों टांगे और दो बाजू डिलीवर हो चुकी थी। देख कर पसीने छूट गए। एक मिनट सोचा कि मेडिकल भेज दिया जाए। फिर सोचा इस हालत में कैसे भेजेंगे? अगले ही पल सोचा कोशिश करते हैं । मन ही मन Dr GS Sekhon मेरे बॉस याद आ गए। वे कहते थे कि कितना भी मुश्किल मामला हो अपनी कॉमन सैंस को मत भूलो और पक्के निश्चय के साथ शांत भाव से जुट जाओ । जुट गया । जल्दी लोकल लगाकर episiotomy incision दिया और निरीक्षण किया। महिला का हौंसला बढ़ाया। बाकी के दो बाजू डिलीवर करने में 15 मिन्ट लगे । पसीने छूट रहे थे । खैर फिर मुश्किल से एक सिर और डिलीवर करवाया। फिर भी कुछ बाकी था । देखा अच्छी तरह तो एक सिर अभी बाकी था और पहले वाले सिर से कुछ बड़ा था । कोशिश की । episiotomy incision को extend किया । 15 से 20 मिन्ट की मश्शक्त के बाद दूसरा सिर भी डिलीवर हो गया । monaster था डेथ हो चुकी थी। मगर हम महिला को बचा पाए। पता लगता गया कि दो सिर चार बाजू चार टांगो वाला बच्चा पैदा हुआ है । कौतूहल वश बहुत लोग इकट्ठे हो गए थे। 6 महीने के बाद वापिस spm deptt में आ गया । 2-3 साल के बाद एक हैंड प्रोलैप्स का केस रेफ़ेर हुआ मेडिकल के लिए । रहडू पर लिटा कर बाजार के बीच से ले जा रहे थे तो किसी ने पूछा के बात कहां ले जा रहे हो। बताया कि एक हाथ बाहर आ गया । मेडिकल ले जा रहे हैं । तो अनजाने में उस बुजुर्ग ने कहा - एक बख्त वो था जिब चार चार हाथां आले की डिलीवरी करवा दी थी, आज एक हाथ काबू कोनी आया। किसी ने बताया था जब वह मरीज मेरे पास 6 वार्ड में दाखिल था । मेरे को मेरे बॉस Dr सेखों एक बार फिर याद आये। बहुत अलग किस्म की इंसानियत के धनी थे Dr सेखों।
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पुरानी यादें
24 -25 साल पहले की बात है । नार्थ जोन सर्जन कांफ्रेंस जम्मू में आयोजित की गई थी । रोहतक से 25-30 डॉक्टर थे । एक दिन सभी का मन वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा का बना। मैने मना किया तो सभी ने अनुरोध किया कि चलें । हम चल दिये ।
अर्ध कन्वारी से कुछ पहले 4-5 महिलाएं और 5-6 पुरुष परेशान से दिखाई दे रहे थे। हमारे में से किसी ने पूछा-क्या बात है क्या हुआ।
बताया- उनके एक बुजुर्ग पेशाब करने बैठे थे और वे नीचे खाई में लुढ़क गए हैं । उन्हें देखने गए हैं।
हमने भी बुजुर्ग को ढूंढने की इच्छा बनाई और 5-6 डॉक्टर हम नीचे उतरते चले गए । 150 गज के करीब नीचे उतरने के बाद हमने आवाज लगाई कि क्या बुजुर्ग मिल गए। और नीचे से आवाज आई- हाँ मिल गए। हमने पूछा- कैसी तबियत है? जवाब आया- ठीक हैं। उप्पर रास्ते में खड़े लोगों ने सुना तो कुछ जय माता की बोलते चले गए।
हमने फिर पूछा कि हम डॉक्टर हैं कोई चोट है तो हम आ जाते हैं मदद करने । बताओ कहाँ पर हो।
फिर आवाज आई थोड़ी धीमी - वो तो चल बसे । इतनी देर में हम भी वहां पहुंच गए थे। पूछा- पहले ठीक क्यों कहा ? जवाब था कि ऊपर वाले रिश्तेदारों में से किसी को सदमा न लग जाये इसलिए ।
कुछ लोगों को तो लगा कि माता ने उस बुजुर्ग को बचा लिया। मगर सच्चाई यही थी कि माता उस बुजुर्ग को नहीं बचा पाई।
मैने सभी डॉक्टर सहयोगियों से पूछा -- यदि बुजुर्ग जिंदा होते और चोटिल होते तो हम क्या फर्स्ट एड कर सकते थे । सब ने अपने अपने ढंग से बात रखी। मैने फिर कहा- बिना इमरजेंसी किट के शायद हम ज्यादा फर्स्ट एड करने की हालत में नहीं होते।
हम सबने तय किया कि जब इस तरह के ग्रुप में कहीं जाएंगे तो इमरजेंसी किट जरूर साथ लेकर चलेंगे ।
बाकियों का तो पता नहीं मैने एक किट जरूर बना ली ।
तीन साल बाद वही कांफ्रेंस पी जी आई चंडीगढ़ में थी। कालेज की बस में गए थे हम सब । वापसी पर अम्बाला पहुंचने से पहले हमारे सामने ट्रैक्टर सड़क के किनारे पलट गया। हमने गाड़ी रुकवाई ।
ड्राइवर ट्रैक्टर के पहिये के नीचे दबा था । हमने सबने मिलकर उसको निकाला और देखा तो वह शॉक में था । मैं ने इमरजेंसी किट से उसे मेफेंटीन इंजेक्शन दिया और एक वोवरान का inj दिया । कुछ संम्भल गया मरीज । हमने उसे अपनी गाड़ी में लिटाया और उसे अम्बाला सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया । इलाज शुरू हुआ तो मरीज और इम्प्रूव हुआ ।
3 साल तक लगता था यह किट खामखा उठाये फिरता हूँ मगर उस रोज लगा कि खामखा नहीं उठाई किट ।
शायद जो डॉक्टर साथी इन दोनों मौकों पर थे उनको याद हों ये दोनों घटनाएं ।
रणबीर दहिया
9812139001
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डॉ सुरेश शर्मा - पानीपत की चौथी लड़ाई
डा सूरजभान
राजेश अत्रेय
डा शंकर इसराना
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पुरानी यादें --मेरे बॉस डॉ सेखों
1976 -1977 का दौर
मेरी पोस्टिंग spm deptt की तरफ से सिविल अस्पताल बेरी में कर दी गई। सिविल अस्पताल के अलावा लेडीज का विंग भी था बाजार के अंदर जा कर । उसमें एक बुजुर्ग महिला फार्मासिस्ट की पोस्टिंग थी। designation दूसरा भी हो सकता है । वहां से सन्देश आया शाम के वक्त कि एक मुश्किल डिलीवरी है और डॉक्टर साहब को बुलाया है। मैं सोचता जा रहा था कि डेढ़ महीने की maternity ड्यूटी में 5 या 6 डिलीवरी देखी थी। सोचते सोचते पहुंच कर देखा कि breech डिलीवरी थी। monaster था। चार टांगे , चार बाजू , धड़ एक और दो सिर वाला। चारों टांगे और दो बाजू डिलीवर हो चुकी थी। देख कर पसीने छूट गए। एक मिनट सोचा कि मेडिकल भेज दिया जाए। फिर सोचा इस हालत में कैसे भेजेंगे? अगले ही पल सोचा कोशिश करते हैं । मन ही मन Dr GS Sekhon मेरे बॉस याद आ गए। वे कहते थे कि कितना भी मुश्किल मामला हो अपनी कॉमन सैंस को मत भूलो और पक्के निश्चय के साथ शांत भाव से जुट जाओ । जुट गया । जल्दी लोकल लगाकर episiotomy incision दिया और निरीक्षण किया। महिला का हौंसला बढ़ाया। बाकी के दो बाजू डिलीवर करने में 15 मिन्ट लगे । पसीने छूट रहे थे । खैर फिर मुश्किल से एक सिर और डिलीवर करवाया। फिर भी कुछ बाकी था । देखा अच्छी तरह तो एक सिर अभी बाकी था और पहले वाले सिर से कुछ बड़ा था । कोशिश की । episiotomy incision को extend किया । 15 से 20 मिन्ट की मश्शक्त के बाद दूसरा सिर भी डिलीवर हो गया । monaster था डेथ हो चुकी थी। मगर हम महिला को बचा पाए। पता लगता गया कि दो सिर चार बाजू चार टांगो वाला बच्चा पैदा हुआ है । कौतूहल वश बहुत लोग इकट्ठे हो गए थे। 6 महीने के बाद वापिस spm deptt में आ गया । 2-3 साल के बाद एक हैंड प्रोलैप्स का केस रेफ़ेर हुआ मेडिकल के लिए । रहडू पर लिटा कर बाजार के बीच से ले जा रहे थे तो किसी ने पूछा के बात कहां ले जा रहे हो। बताया कि एक हाथ बाहर आ गया । मेडिकल ले जा रहे हैं । तो अनजाने में उस बुजुर्ग ने कहा - एक बख्त वो था जिब चार चार हाथां आले की डिलीवरी करवा दी थी, आज एक हाथ काबू कोनी आया। किसी ने बताया था जब वह मरीज मेरे पास 6 वार्ड में दाखिल था । मेरे को मेरे बॉस Dr सेखों एक बार फिर याद आये। बहुत अलग किस्म की इंसानियत के धनी थे Dr सेखों।
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आज किशनपुरा चौपाल में सुश्री उर्मिला जी भूतपूर्व सरपंच गांगटान और साक्षरता आंदोलन की अग्रणी कार्यकर्ता से मुलाकात हुई। पुरानी यादें उस दौर की सांझा की। बहुत अच्छा लगा । उनके साथ दो महिलाएं अपने स्वाथ्य के बारे परामर्श करने आई थी।
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2014 अगस्त में रिटायरमेंट के टाइम पूरी यूनिट के डॉक्टर एक साथ अपनी पुरानी यादें, पुराने दुख सुख के दिन जो यूनिट में गुजरे थे उन्हें अपने अपने ढंग से याद कर रहे थे। एक सीनियर एस आर ने बताया कि एक बार एक unkown मरीज एक्सीडेंट के साथ आया । उसके पेट में चोट थी। उसको ऑपरेट करने की जरूरत थी मगर उसके ग्रुप का खून ब्लड बैंक में नहीं था । बताया कि सर आपका o पॉजिटिव ब्लड है जो पॉजिटिव दूसरे सभी ग्रुप्स को दिया जा सकता है। आप ब्लड बैंक गए वहां एक यूनिट ब्लड unkown मरीज के लिए दिया और वापिस आकर उसका आपरेशन किया। मरीज बचा लिया गया।
मैने बहुत कोशिश की पुरानी याद को याद करने की । मगर जब डेट आदि बताई तो मुझे भी यकीन हुआ कि ऐसा कुछ हुआ था।
और भी कई ना भुलाई जाने वाली पुरानी यादें साझा की गई। अब थोड़ा उम्र का असर होने लगा है तो सोचा सांझा कर लूँ सभी के साथ। मौके पर लिया गया फैंसला यदि एक ज्यान को भी बचा पाता है एक डॉक्टर के जीवन में तो एक एहसास और विश्वास बढ़ता है डॉक्टर का।
मेरे साथ के हमसफ़र सभी डॉक्टरों को याद करते हुए | मुझे गर्व है अपनी यूनिट के उन सभी डॉक्टरों पर जो मरीजों की सेवा में लग्न हैं।
डॉ रणबीर
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'पानीपत की चौथी लड़ाई' साक्षरता आंदोलन की 1992 की रैली।
***पुरानी यादें***
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Dr O.P.Grewal
पन्द्राह साल हो लिए वे चले गए हमनै छोड़कै।।
उनहत्तर साल बिताए ज्ञान विज्ञान मैं जी तोड़कै।।
डॉ ओम प्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान की जनरल बॉडी मीटिंग में हिस्सेदारी करने का मौका मिला। बहुत सी पुरानी यादें भी ताजा हो गई। डॉ ग्रेवाल के व्यक्तित्व बारे कहने को शब्द नहीं हैं मेरे पास। बहुत ही उत्साहवर्धक मीटिंग रही।
6.6.1937.....24.1.2006
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पुरानी यादें---
मंत्री खुर्सीद अहमद जी :
खेल प्रतियोगिता इनाम वितरण समारोह मेडिकल कॉलेज रोहतक सन 1971 के आस पास ।
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डा• कृष्णा सांगवान,डा• सरोज मुदगिल,डा• सुखबीर सांगवान,डा• रणबीर सिंह दहिया,डा• रणबीर हुड्डा,डा• श्रीराम सिवाच ,डा• मुकेश इन्दौरा ,डा• कोहली।
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पुरानी यादें -- डॉ विकाश कथूरिया, डॉ विकास अग्रवाल, डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ सुनील , डॉ पूजा , डॉ कुलदीप, डॉ राजू राजन, डॉ दीपांशु और सभी कॉलीग्स -- आप सबको सलाम ।
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सिरसली स्वर्गीय संतोष के पोते की शादी में -20 अप्रैल, 2022.पुरानी यादें ताजा हो गई। चम्पा सिंह जी भी मिले।
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आज नित्यानंद स्कूल गया सप्तरंग के प्रोग्राम में तो प्रोफेसर जय सिंह मलिक का फोटो नजर आया। देखकर पुरानी यादें ताजा हो गई। बहुत ही नेक दिल इंसान और दोस्त ।
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समस्त कर्मचारी व छात्र पीजीआईएमएस रोहतक द्वारा बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के 131वें जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम ।
पीजीआईएमएस,रोहतक लेक्चर थिएटर -1 में।
इस 1 थियेटर में कभी 1967से 1971के दौर में अपने गुरुओं से पढ़ा और बहुत कुछ सीखा और फिर 1983 से 2014 तक पढ़ाया भी। बहुत सी पुरानी यादें ताजा हो गयी। (42 साल का सफर)
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हरियाणा के प्रथम साक्षरता अभियान, जो कि पानीपत जिले में चला था, उस अभियान के एक परोधा डॉ. रणबीर सिंह दहिया (पी.जी.आई.एम.एस. के सेवानिवृत्त प्रोफेसर) को जिला विकास भवन में आयोजित हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यक्रम में सुनने का मौका मिला। सचमुच आज भी युवाओं जैसा जोश हैं डॉ. दहिया में।
इसी कार्यक्रम में कुछ फलैक्स पर मेरे द्वारा विज्ञान लोकप्रियकरण एवं अंधविश्वासों के खिलाफ लिखे लेख और कुछ रिपोर्ट भी छपी हुई थी। पुरानी यादे ताजा हो गई। धन्यवाद, हरियाणा विज्ञान मंच का।
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आज बहुत दिनों बाद एनोटमी विभाग के लेक्चर थिएटर वन में 2 घण्टे के लिए जाने का मौका मिला । 1967 कि यादें ताजा हो गई । पुरानी यादें ; पुराने अध्यापक : डॉ इंदरजीत दीवान, डॉ इंद्रबीर सिंह , डॉ छिबर, डॉ गांधी, डॉ राठी याद आ गए। 67 बैच के साथी भी दिमाग में घूम गए । सुशील खुराना, आर एन कालरा, अशोक भाटिया, दयासागर गोयल, हरीश भंडारी , रमेश मित्तल, ईश्वर नासिर, रीटा गुलाटी, कर्मजीत कौर, कृष्णा सहरावत , स्वर्ण लता, विमला कादयान आदि आदि।
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कल भिवानी में डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ शिव शंकर भारद्वाज , डॉ ईश्वर दास और डॉ त्रिलोकी गुप्ता से मिलने का और पूरानी यादें ताजा करने का मौका मिला और भरपूर सहयोग मिला ।
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795 पिल्लर(टिकरी बॉर्डर) पर जन स्वास्थ्य अभियान द्वारा 1 साल किसानों के लिए फ्री हेल्थ कैम्प का आयोजन । आज वहां से गुजरने का मौका मिला तो पुरानी यादें ताजा हो गयी तो यह वीडियो बना लिया।
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भुली बिसरी यादें
सन 1956 की बात है की मेरे पिताजी चौधरी जागे राम सिरसा से बतोर इंस्पेक्टर एग्रीकल्चर की पोस्ट से बतौर फार्म मैनेजर सरकारी एग्रीकल्चर फार्म रोहतक में तबादला हो कर आए। यह फार्म 100 एकड़ जमीन में बना सरकारी एग्रीकल्चर फार्म था , जिसमें हर तरह की खेती की जाती थी । चार जोड़ी हट्टे कट्टे बैल थे जो खेती करने में बहुत कारगर रूप से इस्तेमाल किए जाते थे । पिताजी 1966 तक यहां पर रहे और यहीं से रिटायर हो गए। आने वाले दिनों में यह फार्म नहीं रहा और जमीन कुछ बेच दी गई कुछ पर सरकारी दफ्तर खुलते गए और सरकारी अफसरों के रहने के लिये कोठियां और मकान बनते गए। सिरफ़ एग्रीकल्चर फार्म का मेन गेट बचा है जो कमिश्नर के रेजिडेंस और दफ्तर दोनों यहां हैं, तक जाता है बाकि एग्रो मॉल इसकी जमीन में बना और कई कॉलोनी भी बन गई । बहुत से मकान हैं । दो पीपल के पेड़ आज भी पहचाने जा सकते हैं जो हमारे घर के सामने मौजूद थे। भूली बिसरी यादें हैं पूरे फॉर्म में घूमते थे। पिताजी बहुत सख्त मिजाज थे और फार्म के खेत से चूसने के लिए गन्ने भी नहीं लाने देते थे। बोहर वालों के खेतों से लेकर आते थे। और चीजों का तो मतलब ही नहीं । यहीं से मैं बिल्कुल साथ लगता जाट स्कूल है वहां पर पढ़ने जाने लगा । पहले प्राइमरी स्कूल में पढ़ा और फिर हाई स्कूल में छठी क्लास से हायर सेकेंडरी किया । बहुत सी यादें हैं उस दौर की जिन्हें याद करना इतना आसान नहीं है आज एक बार कोशिश है उन पुरानी यादों को याद करने की।
प्राइमरी स्कूल में पहले एक ही टीचर थे मास्टर फतेह सिंह दलाल। तीसरी में हुए तो सूरजमुखी बहिनजी ने भी ज्वाइन कर लिया। पांचवी तक पहुंचे तो मास्टर दलजीत सिंह राठी जी भी क्लास लेने लगे।
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भूली बिसरी यादें
1978 में मेडिकल रोहतक में 98 दिन की हड़ताल हुई..उन दिनों चौधरी हरद्वारी लाल वाईस चांसलर थे। मेरे जीवन में बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई यह हड़ताल।
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वार्ड 6-- भूली बिसरी यादें
एक बार की बात की झरौट के बुजुर्ग अपनी घरवाली को लेकर आये । उसकी एक टांग में गैंग्रीन हो गई बायीं या दायीं याद नहीं। हमने सभी concerned विभागों की राय ली और यह तय हुआ कि amputation करनी होगी । ताऊ को समझाया। कटने की बात सुनकर दोनों घबरा गए । ताऊ मेरे कमरे में आया और हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया। मैने बिठाया और उसकी और देखा। " काटनी ए पड़ैगी डॉ साहब। और कोए राह कोण्या इसकी ज्यान नै खतरा करदेगी या गैंग्रीन -- मैंने जवाब दिया बहुत धीमे से। ताऊ बोल्या-- न्यों कहवै सैं अक गुड़गांव मैं शीतला माता की धोक मारकै ठीक होज्यां हैं। मैंने कहा-- मेरी जानकारी में नहीं। ताऊ-- एक बार जाना चाहवैं सैं। फेर आपके डॉ न्यों बोले-- LAMA होज्या । छुट्टी कोण्या देवें । और फिर हमारे वार्ड में दाखिला नहीं हो सकता। चाहूँ सू आप के वार्ड मैं इलाज करवाना। मैने कहा एक शर्त है-- जै इसकी टांग धोक मारकै ठीक होज्या तो भी लियाईये और नहीं ठीक हो तो भी। ठीक होगी तो मैं बाकी के इसे मरीज भी वहीं गुड़गांव भेज दिया करूंगा और ठीक न हो तो आप ये सारी बात एक पर्चे में लिखकर बांटना कि वहां मेरी घरवाली ठीक नहीं हुई। हम ने discharge on request कर दिया । दो दिन बाद वापिस आ गया । महिला की हालत ज्यादा खराब हुई थी। खैर amputation ortho विभाग के सहयोग से की और महिला ठीक होकर चली गयी । बुजुर्ग जाने से पहले आया कमरे में और कहने लगा-- पर्चा छापना चाहूँ सूँ फेर गांव वाले कह रहे हैं शीतला माता
के खिलाफ पर्चा। बहोत दबाव सै मेरे पै डॉ साहब । पैरों की तरफ हाथ किये । मैने बुजुर्ग को छाती से लगा लिया और आशीर्वाद देने को कहा।
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भुली बिसरी यादें -- मेडिकल कालेज वार्षिक खेल आयोजन--2012
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समस्त कर्मचारी व छात्र पीजीआईएमएस रोहतक द्वारा बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के 131वें जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम ।
पीजीआईएमएस,रोहतक लेक्चर थिएटर -1 में।
इस 1 थियेटर में कभी 1967से 1971के दौर में अपने गुरुओं से पढ़ा और बहुत कुछ सीखा और फिर 1983 से 2014 तक पढ़ाया भी। बहुत सी पुरानी यादें ताजा हो गयी। (42 साल का सफर)
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हरियाणा के प्रथम साक्षरता अभियान, जो कि पानीपत जिले में चला था, उस अभियान के एक परोधा डॉ. रणबीर सिंह दहिया (पी.जी.आई.एम.एस. के सेवानिवृत्त प्रोफेसर) को जिला विकास भवन में आयोजित हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यक्रम में सुनने का मौका मिला। सचमुच आज भी युवाओं जैसा जोश हैं डॉ. दहिया में।
इसी कार्यक्रम में कुछ फलैक्स पर मेरे द्वारा विज्ञान लोकप्रियकरण एवं अंधविश्वासों के खिलाफ लिखे लेख और कुछ रिपोर्ट भी छपी हुई थी। पुरानी यादे ताजा हो गई। धन्यवाद, हरियाणा विज्ञान मंच का।
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कल भिवानी में डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ शिव शंकर भारद्वाज , डॉ ईश्वर दास और डॉ त्रिलोकी गुप्ता से मिलने का और पूरानी यादें ताजा करने का मौका मिला और भरपूर सहयोग मिला ।
जनवरी 2017
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पुराणी यादें
MBBS के बाद इंटर्नशिप कर रहे थे । 3 महीने की रूरल पोस्टिंग बेरी में थी । SPM विभाग की तरफ से 10 दिन का हेल्थ कैम्प जहाजगढ़ माजरा में लगा। सर्जरी विभाग से सीनियर सर्जन डॉक्टर छाबड़ा की ड्यूटी थी । मेरी ड्यूटी भी सर्जरी सेक्सन में थी । पहले 3 दिन सुबह OPD और शाम को सर्जरी होती। एक दिन शायद बदलू राम का मरीज गर्दन के पिछले हिस्से (Nape of neck) में एक काफी बड़ी गाँठ लेकर आया। उसका diagnosis लाइपोमा(lipoma) बना। शाम को 7 बजे ऑपरेशन शुरू किया। डॉक्टर बलबीर छाबड़ा बेहोशी विभाग से थे ।
पौने घंटे से ज्यादा हो गया । खून ज्यादा बाह गया। गाँठ निकल नहीं पा रही थी । दो यूनिट खून की जरूरत पड़ी। लैब तकनीशियन नहीं मिला। ताला तोड़कर सिट्रेट निकाला और मरीज का सैम्पल लिया । spm deptt के पास एक ट्रक था उस वक्त वाही था। driver जय नारायण था और शाम को बरसात भी तगड़ी हुई थी । गांगटांन गाँव से परली तरफ सड़क पर काफी दूर तक पानी था ।मैंने जय नारायण को कहा कि फुल स्पीड से ट्रक चला मरीज का बचाना बहुत जरूरी है हमें अपनी जान की परवाह नहीं करनी है ।
फुल स्पीड से चलाया। रोहतक पहुंचे । डॉक्टर एल सी गुप्ता को घर से लिया और दो यूनिट ब्लड लेकर हम 1.5 घंटे में जहाजगढ़ माजरा वापिस थे । सब हैरान थे । ऑपरेशन हो चूका था। खून बहुत बह गया था। खून चढ़ाया गया। बदलूराम बच गया। मैंने जयनारायण का बहुत बहुत धन्यवाद किया। Biopsy Report में sarcoma (एक तरह का कैंसर आया) । बाकि इलाज मेडिकल में चला और कई साल जिया बदलू राम ।