भुली बिसरी यादें
पूंडरी की कुछ यादें हैं
बहुत बड़ा मकान था । ग्राउंड था आधा एकड़ का। एक बहुत बड़ा हाल था । 300-400 गज पर पूर्व की तरफ मैन रोड थी उसके दूसरी और बड़ा तैलाब था। शुरू में ही बहुत बड़ी ड्यौढ़ी थी।
पूंडरी से पिताजी का सिरसा तबादला हो गया 1956 में। मॉडल स्कूल में दाखिला लिया पहली जमात में और दुसरी में हुआ तो सिरसा से रोहतक का तबादला हो गया।
सिरसा में डाक खाने वाली गली में किराए के मकान में रहते थे । बिमला बहिन, सन्तोष बहिन, निर्मला बहिन । कमला बहिनजी और शकुंतला बहिन जी की शादी हो चुकी थी।
डाक खाने में कार्यरत कर्म चारी का लड़का था राधे श्याम उससे मेरी दोस्ती थी। डाक खाने के पूर्व की ओर एक बहुत बड़ा ग्राउंड था और उसके दूसरी तरफ जेल थी। सरदार प्रीतम सिंह बेलदार थे जो घर भी कई बार आते थे। तहसीलदार थे चौधरी बदलू राम उनके परिवार से भी मिलना जुलना था। घर के पश्चिम की तरफ मेन रोड थी जिसे डबवाली रोड कहा जाता था।
सिरसा से रोहतक एक ट्रक में समान लादकर रोहतक पहुंचे। सरदार प्रीतम सिंह बेलदार हमारे साथ आये थे। बदलू राम जी का लड़का भी बहुत बार घर आता था।
तीनों बहने गर्ल्स स्कूल में पढ़ने जाती थी।