बुधवार, 30 जुलाई 2025

देश विदेश संपादकीय

         भारत में बढ़ती गैर-बराबरी पर ऑक्सफेम की ताजा रिपोर्ट चौकाने वाली है जिसके अनुसार भारत की कुल सम्पत्ति के 40 फीसदी से ज्यादा हिस्से पर 1 फीसदी चोटी के अमीरों का कब्जा है। पिछले 10 सालों में इनकी सम्पत्ति 121 फीसदी बढ़ी है। देश की सम्पत्ति पर कब्जा करने में यहाँ के अमीरों ने अमरीका और ब्राजील जैसे देशों के अमीरों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। इसी रिपोर्ट के अनुसार भारत के सबसे गरीब 50 फीसदी जनता का देश की कुल सम्पत्ति में हिस्सा घटकर महज 3 फीसदी रह गया है।

             सरकार यह दावा कर रही है कि 7 फीसदी की वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन चुकी है और आने वाले कुछ सालों में जर्मनी को पछाड़कर यह तीसरा नम्बर हासिल कर लेगी। इस दावे को मुँह चिढ़ाती देश की बहुसंख्यक आबादी की भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी और आत्महत्याएँ सरकार की नजरों में चुभती हैं। जैसे वे उनके लिए भयावह दृश्य हों। वहीं मुट्ठीभर धनाढ्यों के स्वर्ग निर्माण और विकास की चमक पर अपनी पीठ थपथपा रही है।
            अंग्रेजों के समय छोटे उत्पादकों, किसानों और मजदूरों को तबाह कर दिया गया था। लाखों लोगों ने आजादी की लड़ाई लड़ते हुए जेल की काल कोठरी में अपनी जवानी गँवाई। मोदी राज न तबाही के उस दौर को कब का पीछे छोड़ दिया है। अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के अनुसार, अंग्रेजों ने भारत से अपने 200 सालों के औपनिवेशिक शासन के दौरान जितनी सम्पत्ति लूटी, इन मौजूदा एक फीसदी अमीरों ने उतनी सम्पत्ति महज पिछले 10 सालों में लूट ली है। इन लूट और कत्लोगारत की रफ्तार अंग्रेजों से 17 गुना तेज है।

        पूँजीपति, उद्योगपति, सट्टेबाज, बड़े डील डिस्ट्रीब्यूटर तथा निर्माण उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा और सेवा क्षेत्र के विभिन्न व्यवसायों के मालिक, सरकारी अधिकार, राजनैतिक पार्टियों के नेता, यानी परजीवी लोगों का समूह ही ऊपरी एक फीसदी तबके का निर्माण करता है। यह तबका खुद कुछ नहीं करता, बल्कि जोंक की तरह मेहनतकश जनता का खून चूस कर मौज उड़ाता है। यह बड़े-बड़े बंगले और फार्महाउस में रहते हैं। महँगी गाड़ी से लेकर प्राइवेट जेट में यात्रा करते हैं। इनके पास अय्याशी के तमाम साधन मौजूद हैं। यह गिरोह अथाह पूँजी का मालिक, तकनीक सम्पन्न, मौजूदा व्यवस्था का पक्का समर्थक और जन आंदोलन का प्रखर विरोधी है। ये अपनी तरक्की ही देश की तरक्की समझता है।


साभार:देश - विदेश
अनियतकालीन बुलेटिन

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

ड्रीम

ड्रीम 2047
अप्रैल 2017 

Biodata

 



नाम :
डॉ रणबीर सिंह दहिया                              जन्म दिन :
11 .3 . 1950 बरोना गांव में

पिता का नाम : श्री जागे राम                माता का नाम : श्रीमती हंस कौर
शिक्षा: 
सिरसा मॉडल स्कूल-- पहली कक्षा --1955
जाट प्राइमरी स्कूल रोहतक--1956 दूसरी से चौथी क्लास
जाट हायर सेकंडरी स्कूल रोहतक -5 वी से 11 रवीं ।

गवर्मेंट कॉलेज रोहतक -प्री मैडीकल 

मेडिकल कॉलेज रोहतक से -- एमबीबीएस व एम एस .।

मेडिकल में दाखिला-- 1967 
MBBS पास की..दिसम्बर,1971
एक साल की इंटर्नशिप--1.1.1972 से 31.12.1972
हाउस जॉब..1.1.1973 --31.12.1973
एम एस - 1974-1975
डिग्री मिली एमएस की ..सितम्बर, 1977 थीसिस अप्रूव होने के बाद।

सर्विस मेडिकल में -- 1976 से 2014(तकरीबन 38 साल )


मेलिंग पता : पी-27, इन्द्र प्रस्थ कालोनी , सोनीपत रोड़ ,रोहतक ।  हरियाणा , इंडिया


मोबाइल न. 9812139001



* रिटायर्ड सीनियर प्रोफेसर और यूनिट iv हेड सर्जरी विभाग ,पीजीआईएमएस , रोहतक। 


** भूतपूर्व परीक्षा नियंत्रक , यूनिवर्सिटी  हेल्थ साइंसेज , रोहतक।


*** भूतपूर्व विजिलेंस अफसर ,हरयाणा मेडिकल एजुकेशन विभाग, पीजीआईएमएस , रोहतक । 


***भूतपूर्व प्रेजिडेंट लिटरेरी एंड मैगजीन क्लब पीजीआईएमएस , रोहतक । 

 **** भूतपूर्व प्रेजिडेंट ,

हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ।


मैरिज एनीवर्सरी—27 December , 1972


****दूसरी गतिविधियां 


1. बेस्ट एथलिट ऑफ मेडिकल कॉलेज।

 2.  कॉलेज कलर इन एथलेटिक्स।


**** साहित्यिक :


 1. पोस्ट मार्टम ( कहानी संग्रह) प्रकाशित  : 


2.मलबे के नीचे (नावल) प्रकाशित

3. 600 के लगभग रागिनी और  12 किस्से

प्रकाशित

*चन्दर शेखर आजाद

 * शहीद उधम सिंह

*किस्सा म्हारा थारा

*किस्सा चंपा चमेली

* किस्सा फौजी मेहर सिंह

* किस्सा बाजे भगत
* किस्सा  सुभाषचंद्र बोस
* किस्सा सफदर हाशमी
* किस्सा  1857
* संकट छाग्या -हरियाणवी गीत नाटिका
अप्रकाशित
* किस्सा आण्डी सद्दाम
*.किस्सा किसान आन्दोलन
*किस्सा रामफल कमला
* झलकारी बाई
*किस्सा नूर ईरानी
*किस्सा हीरो होंडा 

संस्थापक जनरल सेक्रेटरी  : जनवादी सांस्कृतिक मंच हरियाणा 1983

संस्थापक जनरल सेक्रेटरी : हरियाणा विज्ञान मंच 1987

संस्थापक जनरल सेक्रेटरी भारत ज्ञान विज्ञान समिति, हरियाणा।

पानीपत साक्षरता अभियान में दो वर्ष फुल टाइम काम किया । 


डॉ रणबीर सिंह दहिया 

पी-27, इन्द्र प्रस्थ कॉलोनी , सोनीपत रोड ,रोहतक।

अभी के टाइम --

प्रधान, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति।

कोर ग्रुप सदस्य : जन स्वास्थ्य अभियान , हरियाणा।

फ्री हेल्थ क्लीनिक:

किशन पूरा रोहतक की चौपाल में  7.10.14 से मंगलवार और शुक्रवार दो दिन की फ्री हेल्थ चेक अप क्लीनिक 9 बजे से 12 बजे तक अभी तक जारी है।

हुमायूंपुर

भूतपूर्व वाईस चांसलर एमडीयू के घर समाज सेवा केंद्र पर हर मंगलवार  को बजे से तीन बजे तक फ्री हेल्थ चेक अप क्लीनिक    2015 से  अब  तक ।

औसतन 5..6  फ्री हेल्थ कैम्प अलग अलग  गांव में (कुल मिलाकर 20 कैम्प 5 साल में )

जनता और हरयाणा ज्ञान विज्ञान समिति के एक्टिविस्ट और जन स्वास्थ्य अभियान हरियाणा के डॉक्टरों और एक्टिविस्ट की मदद से यह सेवा का काम हो पा रहा है।
टिकरी बॉर्डर
स्थान :* अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा का 795 पिल्लर पर टेंट
शुरू करने की तिथि -
2 दिसंबर, 2020 प्रतिदिन और फिर अगस्त 2021 से सप्ताह में 3 दिन (सोमवार, बुधवार और शनिवार) 9 दिसम्बर तक।
2 दिसंबर से 31 दिसंबर, 2020 तक---
2130 मरीज
1 जनवरी 2021 से अब तक 9 दिसम्बर तक देखे गए  मरीज: 15440
कुल मरीज :17570
*दवाइयाँ*
असोसिएशनों , कई ग्राम वासियों , व्यक्तियों और मेडिकल स्टोरज द्वारा दान किये गए 350000 रुपये के मूल्य की दवाएं लगी।





गुरुवार, 17 जुलाई 2025

पुरानी यादें

पुरानी यादें 
24 -25 साल पहले की बात है । नार्थ जोन सर्जन कांफ्रेंस जम्मू में आयोजित की गई थी । रोहतक से 25-30 डॉक्टर थे । एक दिन सभी का मन वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा का बना। मैने मना किया तो सभी ने अनुरोध किया कि चलें । हम चल दिये । 
       अर्ध कन्वारी से कुछ पहले 4-5 महिलाएं और 5-6 पुरुष परेशान से दिखाई दे रहे थे। हमारे में से किसी ने पूछा-क्या बात है क्या हुआ। 
बताया- उनके एक बुजुर्ग पेशाब करने बैठे थे और वे नीचे खाई में लुढ़क गए हैं । उन्हें देखने गए हैं। 
       हमने भी बुजुर्ग को ढूंढने की इच्छा बनाई और 5-6 डॉक्टर हम नीचे उतरते चले गए । 150 गज के करीब नीचे उतरने के बाद हमने आवाज लगाई कि क्या बुजुर्ग मिल गए। और नीचे से आवाज आई- हाँ मिल गए। हमने पूछा- कैसी तबियत है? जवाब आया- ठीक हैं। उप्पर रास्ते में खड़े लोगों ने सुना तो कुछ जय माता की बोलते चले गए।
         हमने फिर पूछा कि हम डॉक्टर हैं कोई चोट है तो हम आ जाते हैं मदद करने । बताओ कहाँ पर हो।
फिर आवाज आई थोड़ी धीमी - वो तो चल बसे । इतनी देर में हम भी वहां पहुंच गए थे। पूछा- पहले ठीक क्यों कहा ? जवाब था कि ऊपर वाले रिश्तेदारों में से किसी को सदमा न लग जाये इसलिए । 
        कुछ लोगों को तो लगा कि माता ने उस बुजुर्ग को बचा लिया। मगर सच्चाई यही थी कि माता उस बुजुर्ग को नहीं बचा पाई। 
      मैने सभी डॉक्टर सहयोगियों से पूछा -- यदि बुजुर्ग जिंदा होते और चोटिल होते तो हम क्या फर्स्ट एड कर सकते थे । सब ने अपने अपने ढंग से बात रखी। मैने फिर कहा- बिना इमरजेंसी किट के शायद हम ज्यादा फर्स्ट एड करने की हालत में नहीं होते।
         हम सबने तय किया कि जब इस तरह के ग्रुप में कहीं जाएंगे तो इमरजेंसी किट जरूर साथ लेकर चलेंगे । 
बाकियों का तो पता नहीं मैने एक किट जरूर बना ली । 
तीन साल बाद वही कांफ्रेंस पी जी आई चंडीगढ़ में थी। कालेज की बस में गए थे हम सब । वापसी पर अम्बाला पहुंचने से पहले हमारे सामने ट्रैक्टर सड़क के किनारे पलट गया। हमने गाड़ी रुकवाई ।
    ड्राइवर ट्रैक्टर के पहिये के नीचे दबा था । हमने सबने मिलकर उसको निकाला और देखा तो वह शॉक में था । मैं ने इमरजेंसी किट से उसे मेफेंटीन इंजेक्शन दिया और एक वोवरान का inj दिया । कुछ संम्भल गया मरीज । हमने उसे अपनी गाड़ी में लिटाया और उसे अम्बाला सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया । इलाज शुरू हुआ तो मरीज और इम्प्रूव हुआ ।
   3 साल तक लगता था यह किट खामखा उठाये फिरता हूँ मगर उस रोज लगा कि खामखा नहीं उठाई किट ।
शायद जो डॉक्टर साथी इन दोनों मौकों पर थे उनको याद हों ये दोनों घटनाएं ।
रणबीर दहिया
9812139001
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डॉ सुरेश शर्मा - पानीपत की चौथी लड़ाई 
डा सूरजभान
राजेश अत्रेय
डा शंकर इसराना
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पुरानी यादें --मेरे बॉस डॉ सेखों 
1976 -1977 का दौर 
मेरी पोस्टिंग spm deptt की तरफ से सिविल अस्पताल बेरी में कर दी गई। सिविल अस्पताल के अलावा लेडीज का विंग भी था बाजार के अंदर जा कर । उसमें एक बुजुर्ग महिला फार्मासिस्ट की पोस्टिंग थी। designation दूसरा भी हो सकता है । वहां से सन्देश आया शाम के वक्त कि एक मुश्किल डिलीवरी है और डॉक्टर साहब को बुलाया है। मैं सोचता जा रहा था कि डेढ़ महीने की  maternity ड्यूटी में 5 या 6 डिलीवरी देखी थी। सोचते सोचते पहुंच कर देखा कि breech डिलीवरी थी। monaster था। चार टांगे , चार बाजू , धड़ एक और दो सिर वाला। चारों टांगे और दो बाजू डिलीवर हो चुकी थी। देख कर पसीने छूट गए। एक मिनट सोचा कि मेडिकल भेज दिया जाए। फिर सोचा इस हालत में कैसे भेजेंगे? अगले ही पल सोचा कोशिश करते हैं । मन ही मन Dr GS Sekhon मेरे बॉस याद आ गए। वे कहते थे कि कितना भी मुश्किल मामला हो अपनी कॉमन सैंस को मत भूलो और पक्के निश्चय के साथ शांत भाव से जुट जाओ । जुट गया । जल्दी लोकल लगाकर  episiotomy incision दिया और निरीक्षण किया। महिला का हौंसला बढ़ाया। बाकी के दो बाजू डिलीवर करने में 15 मिन्ट लगे । पसीने छूट रहे थे । खैर फिर मुश्किल से एक सिर और डिलीवर करवाया। फिर भी कुछ बाकी था । देखा अच्छी तरह तो एक सिर अभी बाकी था और पहले वाले सिर से कुछ बड़ा था । कोशिश की । episiotomy incision को extend किया । 15 से 20 मिन्ट की मश्शक्त के बाद दूसरा सिर भी डिलीवर हो गया । monaster था डेथ हो चुकी थी। मगर हम महिला को बचा पाए। पता लगता गया कि दो सिर चार बाजू चार टांगो वाला बच्चा पैदा हुआ है । कौतूहल वश बहुत लोग इकट्ठे हो गए थे। 6 महीने के बाद वापिस spm deptt में आ गया । 2-3 साल के बाद एक हैंड प्रोलैप्स का केस रेफ़ेर हुआ मेडिकल के लिए । रहडू पर लिटा कर बाजार के बीच से ले जा रहे थे तो किसी ने पूछा के बात कहां ले जा रहे हो। बताया कि एक हाथ बाहर आ गया । मेडिकल ले जा रहे हैं । तो अनजाने में उस बुजुर्ग ने कहा - एक बख्त वो था जिब चार चार हाथां आले की डिलीवरी करवा दी थी, आज एक हाथ काबू कोनी आया। किसी ने बताया था जब वह मरीज मेरे पास 6 वार्ड में दाखिल था । मेरे को मेरे बॉस Dr सेखों एक बार फिर याद आये। बहुत अलग किस्म की इंसानियत के धनी थे Dr सेखों।
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आज किशनपुरा चौपाल में सुश्री उर्मिला जी भूतपूर्व सरपंच गांगटान और साक्षरता आंदोलन की अग्रणी कार्यकर्ता से मुलाकात हुई। पुरानी यादें उस दौर की सांझा की। बहुत अच्छा लगा । उनके साथ दो महिलाएं अपने स्वाथ्य के बारे परामर्श करने आई थी।
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2014 अगस्त में रिटायरमेंट के टाइम पूरी यूनिट के डॉक्टर एक साथ अपनी पुरानी यादें, पुराने दुख सुख के दिन जो यूनिट में गुजरे थे उन्हें अपने अपने ढंग से याद कर रहे थे। एक सीनियर एस आर ने बताया कि एक बार एक unkown मरीज एक्सीडेंट के साथ आया । उसके पेट में चोट थी। उसको ऑपरेट करने की जरूरत थी मगर उसके ग्रुप का खून ब्लड बैंक में नहीं था । बताया कि सर आपका o पॉजिटिव ब्लड है जो पॉजिटिव दूसरे सभी ग्रुप्स को दिया जा सकता है। आप ब्लड बैंक गए वहां एक यूनिट ब्लड unkown मरीज के लिए दिया और वापिस आकर उसका आपरेशन किया। मरीज बचा लिया गया। 
मैने बहुत कोशिश की पुरानी याद को याद करने की । मगर जब डेट आदि बताई तो मुझे भी यकीन हुआ कि ऐसा कुछ हुआ था। 
और भी कई ना भुलाई जाने वाली पुरानी यादें साझा की गई। अब थोड़ा उम्र का असर होने लगा है तो सोचा सांझा कर लूँ सभी के साथ। मौके पर लिया गया फैंसला यदि एक ज्यान को भी बचा पाता है एक डॉक्टर के जीवन में तो एक एहसास और विश्वास बढ़ता है डॉक्टर का।
मेरे साथ के हमसफ़र सभी डॉक्टरों को याद करते हुए | मुझे गर्व है अपनी यूनिट के उन सभी डॉक्टरों पर जो मरीजों की सेवा में लग्न हैं। 
डॉ रणबीर
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'पानीपत की चौथी लड़ाई' साक्षरता आंदोलन की 1992 की रैली।
***पुरानी यादें***
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Dr O.P.Grewal
पन्द्राह साल हो लिए वे चले गए हमनै छोड़कै।।
उनहत्तर साल बिताए ज्ञान विज्ञान मैं जी तोड़कै।।
डॉ ओम प्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान की जनरल बॉडी मीटिंग में हिस्सेदारी करने का मौका मिला। बहुत सी पुरानी यादें भी ताजा हो गई। डॉ ग्रेवाल के व्यक्तित्व बारे कहने को शब्द नहीं हैं मेरे पास। बहुत ही उत्साहवर्धक मीटिंग रही।
6.6.1937.....24.1.2006
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पुरानी यादें---
मंत्री खुर्सीद अहमद जी :
खेल प्रतियोगिता इनाम वितरण समारोह मेडिकल कॉलेज रोहतक सन 1971 के आस पास ।
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डा• कृष्णा सांगवान,डा• सरोज मुदगिल,डा• सुखबीर सांगवान,डा• रणबीर सिंह दहिया,डा• रणबीर हुड्डा,डा• श्रीराम सिवाच ,डा• मुकेश इन्दौरा ,डा• कोहली।
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पुरानी यादें -- डॉ विकाश कथूरिया, डॉ विकास अग्रवाल, डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ सुनील , डॉ पूजा , डॉ कुलदीप, डॉ राजू राजन, डॉ दीपांशु और सभी कॉलीग्स -- आप सबको सलाम ।
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सिरसली स्वर्गीय संतोष के पोते की शादी में -20 अप्रैल, 2022.पुरानी यादें ताजा हो गई। चम्पा सिंह जी भी मिले।
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आज नित्यानंद स्कूल गया सप्तरंग के प्रोग्राम में तो प्रोफेसर जय सिंह मलिक का फोटो नजर आया। देखकर पुरानी यादें ताजा हो गई। बहुत ही नेक दिल इंसान और दोस्त ।
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समस्त कर्मचारी व छात्र पीजीआईएमएस रोहतक द्वारा बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के 131वें जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम ।
पीजीआईएमएस,रोहतक लेक्चर थिएटर -1 में।
इस 1 थियेटर में कभी 1967से 1971के  दौर में अपने गुरुओं से पढ़ा और बहुत कुछ सीखा और फिर 1983 से 2014 तक पढ़ाया भी। बहुत सी पुरानी यादें ताजा हो गयी। (42 साल का सफर)
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हरियाणा के प्रथम साक्षरता अभियान, जो कि पानीपत जिले में चला था, उस अभियान के एक परोधा डॉ. रणबीर सिंह दहिया (पी.जी.आई.एम.एस. के सेवानिवृत्त प्रोफेसर) को जिला विकास भवन में आयोजित हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यक्रम में सुनने का मौका मिला। सचमुच आज भी युवाओं जैसा जोश हैं डॉ. दहिया में। 

इसी कार्यक्रम में कुछ फलैक्स  पर मेरे द्वारा विज्ञान लोकप्रियकरण एवं अंधविश्वासों के खिलाफ लिखे लेख और कुछ रिपोर्ट भी छपी हुई थी। पुरानी यादे ताजा हो गई। धन्यवाद, हरियाणा विज्ञान मंच का।
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आज बहुत दिनों बाद एनोटमी विभाग के लेक्चर थिएटर  वन में 2 घण्टे के लिए जाने का मौका मिला । 1967 कि यादें ताजा हो गई । पुरानी यादें ; पुराने अध्यापक : डॉ इंदरजीत दीवान, डॉ इंद्रबीर सिंह , डॉ छिबर, डॉ गांधी, डॉ राठी याद आ गए। 67 बैच के साथी भी दिमाग में घूम गए । सुशील खुराना, आर एन कालरा, अशोक भाटिया, दयासागर गोयल, हरीश भंडारी , रमेश मित्तल, ईश्वर नासिर, रीटा गुलाटी, कर्मजीत कौर, कृष्णा सहरावत , स्वर्ण लता, विमला कादयान आदि आदि।
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कल भिवानी में डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ शिव शंकर भारद्वाज , डॉ ईश्वर दास और डॉ त्रिलोकी गुप्ता से मिलने का और पूरानी यादें ताजा करने का मौका मिला और भरपूर सहयोग मिला ।
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795 पिल्लर(टिकरी बॉर्डर) पर जन स्वास्थ्य अभियान द्वारा 1 साल किसानों के लिए फ्री हेल्थ कैम्प का आयोजन । आज वहां से गुजरने का मौका मिला  तो पुरानी यादें ताजा हो गयी तो यह वीडियो बना लिया।
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भुली बिसरी यादें 
सन 1956 की बात है की मेरे पिताजी चौधरी जागे राम सिरसा से बतोर इंस्पेक्टर एग्रीकल्चर की पोस्ट से  बतौर फार्म मैनेजर सरकारी एग्रीकल्चर फार्म रोहतक में तबादला हो कर आए। यह फार्म 100 एकड़ जमीन में बना सरकारी एग्रीकल्चर फार्म था , जिसमें हर तरह की खेती की जाती थी । चार जोड़ी हट्टे कट्टे बैल थे जो खेती करने में  बहुत कारगर रूप से इस्तेमाल किए जाते थे ।  पिताजी 1966 तक यहां पर रहे और यहीं से रिटायर हो गए।  आने वाले दिनों में यह फार्म नहीं रहा और जमीन कुछ बेच दी गई कुछ पर सरकारी दफ्तर खुलते गए और सरकारी अफसरों के रहने के लिये कोठियां और मकान बनते गए। सिरफ़ एग्रीकल्चर फार्म का मेन गेट बचा है जो कमिश्नर के  रेजिडेंस और दफ्तर दोनों यहां हैं, तक जाता है बाकि एग्रो मॉल इसकी जमीन में बना और कई कॉलोनी भी बन गई । बहुत से मकान हैं । दो पीपल के पेड़ आज भी पहचाने जा सकते हैं जो हमारे घर के सामने मौजूद थे। भूली बिसरी यादें हैं पूरे फॉर्म में घूमते थे। पिताजी बहुत सख्त मिजाज थे और फार्म के खेत से चूसने के लिए गन्ने भी नहीं लाने देते थे। बोहर वालों के खेतों से लेकर आते थे।  और चीजों का तो मतलब ही नहीं । यहीं से मैं बिल्कुल साथ लगता जाट स्कूल है वहां पर पढ़ने जाने लगा । पहले प्राइमरी स्कूल में पढ़ा  और फिर हाई स्कूल में छठी क्लास से हायर सेकेंडरी किया । बहुत सी यादें हैं उस दौर की जिन्हें याद करना इतना आसान नहीं है आज एक बार  कोशिश है उन पुरानी यादों को याद करने की। 
प्राइमरी स्कूल में पहले एक ही टीचर थे मास्टर फतेह सिंह दलाल। तीसरी में हुए तो सूरजमुखी बहिनजी ने भी ज्वाइन कर लिया। पांचवी तक पहुंचे तो मास्टर दलजीत सिंह राठी जी भी क्लास लेने लगे।
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भूली बिसरी यादें 
1978 में मेडिकल रोहतक में 98 दिन की हड़ताल हुई..उन दिनों चौधरी हरद्वारी लाल वाईस चांसलर थे। मेरे जीवन में बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई यह हड़ताल।
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वार्ड  6-- भूली बिसरी यादें 
एक बार की बात की झरौट के बुजुर्ग अपनी घरवाली को लेकर आये । उसकी एक टांग में गैंग्रीन हो गई बायीं या दायीं याद नहीं। हमने सभी concerned विभागों की राय ली और यह तय हुआ कि amputation करनी होगी । ताऊ को समझाया। कटने की बात सुनकर दोनों घबरा गए । ताऊ मेरे कमरे में आया और हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया। मैने बिठाया और उसकी और देखा। " काटनी ए पड़ैगी डॉ साहब। और कोए राह कोण्या इसकी ज्यान नै खतरा करदेगी या गैंग्रीन -- मैंने जवाब दिया बहुत धीमे से। ताऊ बोल्या-- न्यों कहवै सैं अक गुड़गांव मैं शीतला माता की धोक मारकै ठीक होज्यां हैं। मैंने कहा-- मेरी जानकारी में नहीं। ताऊ-- एक बार जाना चाहवैं सैं। फेर आपके डॉ न्यों बोले-- LAMA होज्या । छुट्टी कोण्या देवें । और फिर हमारे वार्ड में दाखिला नहीं हो सकता। चाहूँ सू आप के वार्ड मैं इलाज करवाना। मैने कहा एक शर्त है-- जै इसकी टांग धोक मारकै ठीक होज्या तो भी लियाईये और नहीं ठीक हो तो भी। ठीक होगी तो मैं बाकी के इसे मरीज भी वहीं गुड़गांव भेज दिया करूंगा और ठीक न हो तो आप ये सारी बात एक पर्चे में लिखकर बांटना कि वहां मेरी घरवाली ठीक नहीं हुई। हम ने discharge on request कर दिया । दो दिन बाद वापिस आ गया । महिला की हालत ज्यादा खराब हुई थी। खैर amputation ortho विभाग  के सहयोग से की और महिला ठीक होकर चली गयी । बुजुर्ग जाने से पहले आया कमरे में और कहने लगा-- पर्चा छापना चाहूँ सूँ फेर गांव वाले कह रहे हैं शीतला माता 
 के खिलाफ पर्चा। बहोत दबाव सै मेरे पै डॉ साहब । पैरों की तरफ हाथ किये । मैने बुजुर्ग को छाती से लगा लिया और आशीर्वाद देने को कहा।
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भुली बिसरी यादें -- मेडिकल कालेज वार्षिक खेल आयोजन--2012
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समस्त कर्मचारी व छात्र पीजीआईएमएस रोहतक द्वारा बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के 131वें जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम ।
पीजीआईएमएस,रोहतक लेक्चर थिएटर -1 में।
इस 1 थियेटर में कभी 1967से 1971के  दौर में अपने गुरुओं से पढ़ा और बहुत कुछ सीखा और फिर 1983 से 2014 तक पढ़ाया भी। बहुत सी पुरानी यादें ताजा हो गयी। (42 साल का सफर)
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हरियाणा के प्रथम साक्षरता अभियान, जो कि पानीपत जिले में चला था, उस अभियान के एक परोधा डॉ. रणबीर सिंह दहिया (पी.जी.आई.एम.एस. के सेवानिवृत्त प्रोफेसर) को जिला विकास भवन में आयोजित हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यक्रम में सुनने का मौका मिला। सचमुच आज भी युवाओं जैसा जोश हैं डॉ. दहिया में। 

इसी कार्यक्रम में कुछ फलैक्स  पर मेरे द्वारा विज्ञान लोकप्रियकरण एवं अंधविश्वासों के खिलाफ लिखे लेख और कुछ रिपोर्ट भी छपी हुई थी। पुरानी यादे ताजा हो गई। धन्यवाद, हरियाणा विज्ञान मंच का।
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कल भिवानी में डॉ अनिल जांगड़ा, डॉ शिव शंकर भारद्वाज , डॉ ईश्वर दास और डॉ त्रिलोकी गुप्ता से मिलने का और पूरानी यादें ताजा करने का मौका मिला और भरपूर सहयोग मिला ।
जनवरी 2017
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