बुधवार, 30 जुलाई 2025

देश विदेश संपादकीय

         भारत में बढ़ती गैर-बराबरी पर ऑक्सफेम की ताजा रिपोर्ट चौकाने वाली है जिसके अनुसार भारत की कुल सम्पत्ति के 40 फीसदी से ज्यादा हिस्से पर 1 फीसदी चोटी के अमीरों का कब्जा है। पिछले 10 सालों में इनकी सम्पत्ति 121 फीसदी बढ़ी है। देश की सम्पत्ति पर कब्जा करने में यहाँ के अमीरों ने अमरीका और ब्राजील जैसे देशों के अमीरों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। इसी रिपोर्ट के अनुसार भारत के सबसे गरीब 50 फीसदी जनता का देश की कुल सम्पत्ति में हिस्सा घटकर महज 3 फीसदी रह गया है।

             सरकार यह दावा कर रही है कि 7 फीसदी की वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन चुकी है और आने वाले कुछ सालों में जर्मनी को पछाड़कर यह तीसरा नम्बर हासिल कर लेगी। इस दावे को मुँह चिढ़ाती देश की बहुसंख्यक आबादी की भुखमरी, कुपोषण, बेरोजगारी और आत्महत्याएँ सरकार की नजरों में चुभती हैं। जैसे वे उनके लिए भयावह दृश्य हों। वहीं मुट्ठीभर धनाढ्यों के स्वर्ग निर्माण और विकास की चमक पर अपनी पीठ थपथपा रही है।
            अंग्रेजों के समय छोटे उत्पादकों, किसानों और मजदूरों को तबाह कर दिया गया था। लाखों लोगों ने आजादी की लड़ाई लड़ते हुए जेल की काल कोठरी में अपनी जवानी गँवाई। मोदी राज न तबाही के उस दौर को कब का पीछे छोड़ दिया है। अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक के अनुसार, अंग्रेजों ने भारत से अपने 200 सालों के औपनिवेशिक शासन के दौरान जितनी सम्पत्ति लूटी, इन मौजूदा एक फीसदी अमीरों ने उतनी सम्पत्ति महज पिछले 10 सालों में लूट ली है। इन लूट और कत्लोगारत की रफ्तार अंग्रेजों से 17 गुना तेज है।

        पूँजीपति, उद्योगपति, सट्टेबाज, बड़े डील डिस्ट्रीब्यूटर तथा निर्माण उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा और सेवा क्षेत्र के विभिन्न व्यवसायों के मालिक, सरकारी अधिकार, राजनैतिक पार्टियों के नेता, यानी परजीवी लोगों का समूह ही ऊपरी एक फीसदी तबके का निर्माण करता है। यह तबका खुद कुछ नहीं करता, बल्कि जोंक की तरह मेहनतकश जनता का खून चूस कर मौज उड़ाता है। यह बड़े-बड़े बंगले और फार्महाउस में रहते हैं। महँगी गाड़ी से लेकर प्राइवेट जेट में यात्रा करते हैं। इनके पास अय्याशी के तमाम साधन मौजूद हैं। यह गिरोह अथाह पूँजी का मालिक, तकनीक सम्पन्न, मौजूदा व्यवस्था का पक्का समर्थक और जन आंदोलन का प्रखर विरोधी है। ये अपनी तरक्की ही देश की तरक्की समझता है।


साभार:देश - विदेश
अनियतकालीन बुलेटिन

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