[29/8, 7:07 pm] Sabka Haryana: भगवान
मंदिर के बाहर बैठा हुआ आसपास का नजारा देख रहा था। लोग मंदिर में प्रवेश करते, शांतमुद्रा में बाहर निकलते और इधर-उधर की भीड़ में खो जाते।
एक सत्तर वर्षीय वृद्ध बाहर निकले। पूजन की गंभीरता चेहरे पर आ गई थी। बाहर आते ही सामने से आ रहे करीब पैंतालीस वर्षीय सज्जन पर नजर पड़ी। एकाएक मुखमंडल का रंग ही बदल गया। वृद्ध ने अपने से छोटे आयु के सज्जन के पांव छुए और गिड़गिड़ाहट के स्वर में पूछा, "सरकार, आप और यहां?"
"हम मंदिर में पूजन करने आये थे, पर अब न करेंगे। जिस मंदिर में तुम जैसे छोटी जाति के लोग हमसे पहले पूजन करें, उस मंदिर में जाकर क्या फायदा।"
बूढ़ा गिड़गिड़ा रहा था। हाथ जोड़ रहा था। पांव छू रहा था। पर बड़े सरकार टस से मस नहीं हो रहे थे और आखिरकार वे लौट ही गये।
मैं बैठा-बैठा सोचने लगा, असली भगवान कौन है? वो जो कि मंदिर के अंदर बैठा है, या वो जो मंदिर के बाहर था?"
कचोटती व्यंग कथाएं
नरेंद्र लोहा
[29/8, 7:13 pm] Sabka Haryana: सूखा
डॉक्टर नरेंद्र सिंह मेरे सहकर्मी चिकित्सक हैं। आमतौर से चाय का 'सेशन' उनके कमरे में ही चलता है। वे मेरे अच्छे मित्र हैं।
परसों की ही बात है। डॉक्टर सिंह 'सूखा' पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे, "सूखा तो हमारा ही बनाया हुआ है। अब कल शाम का ही किस्सा लीजिए। डॉक्टर भंडारी के गृह प्रवेश पर कितनी जबरदस्त पार्टी थी। क्या आली-शान इंतजाम था। भोजन की तो बात ही मत पूछिए।"
डॉक्टर सिंह ने पुनः बोलना प्रारंभ किया, "यह पार्टी कहां तक तर्कसंगत थी ? देश में भयंकर सूखे का प्रकोप है। और हम बुद्धिजीवी इस तरह की पार्टियां दे रहे हैं।"
मैंने चाय का घूंट लेते हुए पूछा, "आप भी थे क्या उस पार्टी में?"
डॉक्टर सिंह मुस्कुरा कर बोले, "औपचारिकता के नाते गया था। भोजन बड़ा स्वादिष्ट था।"
मुझे एकाएक चाय कुछ कड़वी लगने लगी थी।
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नरेंद्र लोहा
[29/8, 7:17 pm] Sabka Haryana: कांच के घर
श्री रामसेवक जी का मूड आज बेहद खराब है। उनकी पत्नी अस्पताल में भरती है। पिछले पांच दिन से रामसेवक जी बेहद चिंतित थे। आज तबीयत कुछ ठीक है और आज ही रामसेवक जी का मूड बेहद खराब है।
उनके खराब मूड का कारण स्पष्ट है। यह अस्पताल बेहद गंदा है। यह अस्पताल उनके जैसे व्यक्ति के लायक नहीं है। वे मुझे बेहद लंबा भाषण देने लगे हैं, "इस अस्पताल को देखिए, जरा गौर से देखिए। क्या यह अस्पताल कहलाने लायक है? बाथरूम गंदे हैं। जगह-जगह पट्टियां बिखरी हुई हैं। गंदगी ही गंदगी। कितने शर्म की बात है?"
मैं रामसेवक जी के विचारों से सहमत होने लगा हूं। हम दोनों अस्पताल के लंबे बरामदे में घूम रहे हैं। एकाएक मैं भी गंदगी देखने लगा हूं ।
अब मैं रामसेवक जी को देख रहा हूं। जेब से बीड़ी निकाली है। वे उसे सुलगा रहे हैं। उन्होंने उसकी राख जमीन पर छिड़की है। उनके मुंह में पहले से ही एक पान है। वे अस्पताल के फर्श को लाल रंग से रंग रहे हैं। फिर बड़े इत्मीनान से मेरे कंधे पर हाथ रखकर कह रहे हैं, "मैं आपसे इस गंदे अस्पताल के बारे में बात कर रहा था। हम सबको मिलकर इसे साफ रखने का प्रयत्न करना चाहिए।"
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नरेंद्र लोहा
[29/8, 9:09 pm] Sabka Haryana: वापसी
आज रोजी बहुत खुश है। दस बरस के पश्चात वह आज कौलिन से मिलेगी। कभी-कभी तो वह यह सोचने लगी थी कि 'कौलिन उसका पति था'। आज वह महसूस करने लगी है कि 'कौलिन उसका पति है'।
दस बरस पहले कौलिन विदेश चला गया था। उसे नौकरी की जरूरत थी। कहने को उसके पास नौकरी थी, पर वो खुश नहीं था। उसे और ज्यादा रुपयों की जरूरत थी, इसीलिए वह विदेश चला गया था।
दस बरस से कोशिश चल रही थी कि रोजी अपने पति के पास पहुंच जाए। पर हर प्रयत्न नाकाम हो रहा था। कभी यहां अड़चन, तो कभी वहां अड़चन। और दस बरस के बाद आज वो अपने पति से मिलने जा रही है।
हवाई जहाज उतर ही रहा है। रोजी अपनी कल्पनाओं में उड़ी जा रही है, 'न जाने कौलिन का अब क्या हाल होगा?' और भी ढेरों सवाल।
हवाई जहाज उतर चुका है। सब उतर रहे हैं। रोजी भी उतर रही है। एक सज्जन ने उससे पूछा, "आप रोजी डिसूजा हैं?"
रोजी ने 'हां' में जवाब दिया।
वो सज्जन बोले, "आपको वापस जाना होगा। आपको इस देश में रहने की इजाजत नहीं मिल सकती। आज सुबह ही आपके पति का एकाएक देहांत हो गया।"
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नरेंद्र लोहा
[29/8, 9:27 pm] Sabka Haryana: उलझे सवाल जिन्दगी के जवाब ढूंढ़ता रहा
दर्द मेरा जो कर सके कम नशा ढूंढ़ता रहा
वक्त की मार है मजबूर हालात जूझता रहा
मिले जीने का बहाना वो राह ढूंढता रहा
[29/8, 9:33 pm] Sabka Haryana: जीवन की सही राह पर जीना नहीं आता
हर चीज में देखा नशा है पर पीना नहीं आता
वो मेरे बगैर जी सकते हैं बस मुझे ही
उनके बिना मुझको जीना ही नहीं आता
[29/8, 9:41 pm] Sabka Haryana: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (NFHS) की तरफ से जारी हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में हर पांचवां पुरुष यानी देश के 22.4% पुरुष शराब के शौकीन हैं. लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में शराब पीने वाले पुरुषों के प्रतिशत में कमी आई है. 2015-16 में यह आंकड़ा 29.2 प्रतिशत था जो कि अब कम हुआ है. हालांकि, कुछ राज्य राष्ट्रीय औसत से आगे निकल रहे हैं.
[29/8, 9:54 pm] Sabka Haryana: चले तो पांव के नीचे
कुचली गई कोई शय
नशे की झोंक में
देखा नहीं कि दुनिया है
शहाय जाफरी
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