गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025

कविताएं**

जिस्म में ताकत है हमारे यारो

सीनों में विरासत है हमारे यारो

फितरत में बगावत है हमारे यारो

समकतो.

काम में हिफाजत है हमारे यारो

पता तुम में हिमाकत है हमारे यारो

तुमसे ही आहत हैं हम हमारे यारो
****
याद तुम्हारी-साफगोई आती है यारो बेझिझकता तुम्हारा कद बढ़ाती है यारो तुम्हारी सलाह दिल में समाती है यारा समाज की उलभने सुलभाती है यारा
*****
आर्थिक मन्दी
आर्थिक मन्दी के दौर ने सताया हमको 
जेब ढीली कर दी इसने रुलाया हमको बहुत सी जगह इसने करतब दिखाए 
आई टी के कई योद्धा इसने मार गिराए सरकारी कंट्रोल भाता नाथा जिसको 
उसी से भीख मांगनी पड़ रही उनको 
पड़ सकता दिल पर बुरा असर बताया चिकित्सकों ने हाल में ऐसा भी फरमाया दिल के दौरे से कैसे आज बचा जाऐगा पूंजीवादी मंदी का दौर कहाँ पहुंचाएगा'
*****
छबके
छबके मारने ना आते तो आज तूं कामयाब नहीं 
बिना सिफारिस कहां नौकरी पूरा होवे ख्वाब नहीं 
छल कपट बिना होवे मानस का आज गुजारा ना 
बिना माला घालें कई हजार की नेता का सहारा ना 
भीतर काला बाहर सफेद‌ यो मुखौटा पहन लिया 
जिसके भीतर सफेद उसने ये कहर सहन किया 
सब कुछ बहग्या आज किसपै कोये यकीन करे
थोड़े घने बचे उनको ये सिस्टम घणा गमगीन करे 
बिना संघर्ष नहीं गुजारा रणबीर यो जान लियो 
मानवता एक दिन जीतैगी बात इतनी मान लियो ।।
*****
चरागे शाम
चरागे शाम ये जलाने का मौका आया यारो गरीब का घर बसाने का मौका आया यारो 
मंदी का दौर संकट है बेरोजगारी का देखो 
ये एकता पूरी दिखाने का मौका आया यारो 
अमीरी का भार गरीबों पे बढ़ाया जा रहा क्यों अपना विरोध जताने का मौका आया यारो 
अब तक लूटा जिन्होंने मानवता को दोस्तो उसकी नींद उड़ाने का मौका आया यारो 
इश्क और पशुता में फर्क क्या होता है यही 
अब दुनिया की बताने का मौका आया यारो 

*****
नीतियों के वार
तुमने किया हर बार नीतियों से वार ये 
जख्में दिल दिये हैं हमको बार बार ये 
नए अंदाज और नए तरीके हैं तुम्हारे 
पहले तो धीभी थी तेज हुई रफ्तार ये
सच न बताओ उसके काले कारनामों 
पर जल्दी पर्दा डालो कहती सरकार ये 
किसान की सब्सिडी पे डाका डाल रहे हैं 
आत्म हत्या कर रहा है उजड़ी बहार ये
रणबीर अब और क्या क्या गिनवाऊं मैं
पता है सारा इनको बनते हैं होशियार ये

*****
इंकलाब
मुझे इकलाब का मौसम लगा है तेरी आंखों में 
विश्वास है आगाज है और घटा है तेरी आंखों में 
न क्यों रस्क हो उस पर मुझे जिसने पैदा किया 
मुझे यह लगने लगा कुछ जुदा है तेरी आंखों में 
तेरा साथ बहुत कुछ आज मायने रखता है यारो 
मेरे मकसद का एक आसरा दिखे तेरी आंखों में
नजर भर देख लेने से उमंगे झूम जाती हैं यारो 
आहवान का खास सिलसिला है तेरी आखों में 
रणबीर देख रहे हैं इन्कलाब जिंदाबाद का नारा 
सुबह और शाम कैसे झलकता है तेरी आंखों में.

16.1.2009.
***
लालच में तेरा सब कुछ खो गया बंदे 
अकेलेपन का ठूंठ हरा हो गया बंदे 
अब दोस्तों को ढूंढ़ोगे यहां तुम यारो 
जिगरी था दोस्त तुम्हारा वो गया बंदे 
दया त्याग मानवता सब भुला दिए हैं 
उसे कैसे भुला दोगे जो चला गया बन्दे 
उसका वास्ता मत देना मक्कारो हमें 
वह भी तुम्हारे ही घर में सो गया बंदे 
गरीब हंस बोल लेता कभी कभी रोता 
वो आसुंओं से तेरा चेहरा धो गया बंदे
****
बच्चे तरुण युवा लड़‌की रह पायें वो गांव कहाँ 
गाँव में बसेवा नहीं तो बताओ हम जायें कहां 
गांव नहीं गांव रहे ना शहर ही बन पाए गांव 
पहला उजड़ गया है नया नजर न आये गांव एक दूजे के कन्धों पर पैर रखते जा रहे देखो 
मानवता खोती जा रही काले बादल छा रहे देखो 
पैसा मंजिल बन गया बाजार यहां आया देखो 
खाओ पियो मौज करो नशा कैसा छाया देखो 
तुम्हें गैरो से कब फुरसत हम ग़म से न खाली 
हमारी चाहत छोड़ के गैरों से दोस्ती निभाली 
चलो आज की दुनिया में हमऑउट डेट हुए हमोर बंद दरवाजे हैं तुम्हारे खुले सब गेट हुए

******
यह तो कभी सोचा ही नहीं था 
दुश्मन से लड़ते लड़ते एक दिन 
हम खुद आपस में भिड़ जायेंगे 
हमारी कमजोरी या चाल उनकी 
क्या हम असलियत समझ पायेंगे 
सोचना बैठ कर ठण्डे दिमाग से 
कब कदम से कदम मिलायेंगे
****
"अमरीका के बारे में
 जानते हो?  
 साफ-सफाई है
 ऊंची ऊंची इमारते हैं
बिजली कभी गुल नहीं होती 
काम करवाने का पैसा 
देना नही पड़ता है 
बहुत उन्नतशील है अमरीका 
पशुओं को गेहूं  खिलाता है 
फिर  पशुओं को खुद खाता है
छोटी मच्छलियों को पालता है
 फिर उन्हें बड़ी मच्छलियों को
 खिलाता है हंसते हंसते 
जब इससे भी काम नहीं चलता 
तो आतंक फैलाता है या फिर 
फैलवाता है 
युद्ध करता है युद्ध करवाता है 
हथियार दोनों को बेचता है
अमरीका 
उसे क्या  मां की कोख खाली 
होती है तो हो चाहे वह 
इस पार की मां है या उस पार की 
जैसे अब पाकिस्तान और 
 हिन्दुस्तान दोनों को बेच रहा है 
अपने हथियार अमरीका, 
अपने परांठे सेक रहा है 
अब पाकिस्तान हिन्दु‌स्तान 
लड़ें या न लड़ें उसने तो अपने 
हथियारों का सौदा कर ही लिया 
इसकी चाल समझना है मुश्किल
दिमाग हो तो समझें चाल हम
इसे तो गिरवी रख दिया हमने
अपने परम परमेश्वर भगवान 
के पास
आस्था सवाल नहीं चाहती
सोचना नहीं चाहती
मगर अपने तौर पर सोचना
एक न एक दिन पड़ेगा हम सबको
उस दिन अमरीका के बारे में 
बहुत जान चुके होंगे हम।

******
      दूसरी दुनिया संभव है
सड़कों पर मजदूर आए थे
दूर दूर से पूरे भारत देश के
साथ ही बुद्धिजीवी भी आए थे
कोई इंजीनियर कोई डॉक्टर
कोई कोई समाज शास्त्री
'सब रंगों का था समावेश 
भारत देश हमारा देश '
' बिना महिला सहयोग के
हमारा विकास अधूरा है '
' साक्षरता हम वंचितों का
एक पैना हथियार है '
इन सब नारों की गूंज
सुनाई दी रांची शहर में
एक नई दुनिया की बात 
कई तरह से की गई वहां
जहां गरीब अमीर की
जात गौत और नात की
नाबराबरी लिंग अनुपात की
जहां ऊंच और नीच की 
जहां ज्ञान के बंटवारे की
बात बीमारी के इलाज की
असमानताएं खत्म होती
जायें
मानव मानव को न चूसे 
जिस दुनिया में वह दुनिया
संभव है
हम सब की एकता के दम
इसे लड़कर हासिल किया
जा सकता है
लगता बड़ा आसान है 
मगर उतना ही मुश्किल
काम है यह.. कैसे
अमीर ने जाल फैलाया
परम्परा का इज्जत का 
जात पात और धर्म का
प्राचीन संस्कृति का
इस या उस मजहब का
और बांट कर रख दिया 
इस चाल को जिस दिन 
हम समझ गए तो
फिर दूसरी दुनिया का
सपना हमारा जल्दी 
बहुत ही जल्दी 
पूरा होगा जरूर
20.12.08
रांची

******
पिछले कुछ साल से 
मौसम का मिजाज बदलता 
जा रहा है
इसका सबसे अधिक असर 
किसानों पर पड़ रहा है
सूखे के लंबे दौर
लगातार बाढ़, कम होती
यह अनियमित वर्षा 
भयानक ओलावृष्टि होना
टिड्डियां का अचानक हमला
किसानों की कमर तोड़ दी है
हालांकि सामुदायिक प्रयास 
रास्ता दिखा सकते हैं
मगर....
उनकी रक्षा के लिए सरकारी
समर्थन और संरक्षण बहुत
जरूरी है
इससे किसान बचेगा तो
उद्योग बचेगा
उद्योग बचेगा तो
भारत महान बचेगा....

********
*दो बेरोजगार (पति -पत्नी)*
 बहुत आसान है मेरी जिंदगी की 
सटीक समीक्षा करना।  
बहुत आसान है मेरी जिंदगी की 
सही तरफदारी करना। 
बहुत आसान है मेरी जिंदगी के 
प्रति मन से करुणा  दिखाना । 
बहुत आसान है मेरी जिंदगी के प्रति 
असल में आंसू बहाना ।

मगर बहुत मुश्किल है 
मेरी जिंदगी जीना। 
स्कूल से आगे बढ़कर 
फिर कॉलेज में जाना होगा 
इसके सपने 
 बहुत बार देखे थे मैंने । 
कौन से कॉलेज में दाखिला हो 
कई बार सोचा था मैंने यह भी। 
एक साल पहले सोचना शुरू किया  कि 
पहले दिन का पहनावा 
क्या होगा 
मेरा कालेज में ? 
हेयर स्टाइल पर भी नजर डाली थी। 
सोचा क्या साइकिल पर ही मुझे 
कॉलेज जाना होगा हर रोज? 
या फिर घरवाले सेकंड हैंड 
स्कूटर का जुगाड़ कर देंगे। 

घर की हालत जुगाड़बाजी 
करने की भी कहां थी। 
यह बात नहीं मेरे भेजे के 
अंदर घुस रही थी। 
इसी उधेड़बुन में पूरा का पूरा दिन 
जुगाड़ बाजी के चक्कर में गुजर जाता। 
आखिर एक दिन 5 लोग आए थे 
हमारे घर में। 
उनकी बहुत आवभगत हुई थी। 
उन लोगों ने मेरे से भी पूछा- -
'बेटी कौन सी क्लास पास की है?' 
दूसरा सवाल था उनका -'कितने नंबर आए' 
मैंने धीमी से अपने नंबर बता दिए थे। 
उनकी नजरें मुझे घूरती 
सी महसूस हुई 
जैसे बकरे को उसके 
मारने से पहले कसाई 
उसे अपनी नजरों में से 
निकाल कर देखता है, 
उसी तरह का माहौल सा लगा मुझे । 
और इसके बाद कसाई 
बकरे को हलाल कर ही देता है। 
मुझे क्या पता था कि मेरा भी 
हलाल होने का वक्त आ गया है। 
और एक महीने के बाद ही 
मेरी शादी कर दी गई । 
एक और बेरोजगार के साथ ।

 2 बेरोजगारों की दुनिया के सपने क्या 
आप सोच सकते हो कि कैसे होंगे? 
हमने भी सोचने की कोशिश की थी 
खूब आगे का रास्ता देखने की। 

पर मैं नहीं देख पाई क्योंकि 
अंधेरे के सिवाय कुछ दिखाई 
नहीं दे रहा था । 
उनकी 2 एकड़ से भी कम जमीन थी। 
'भूखे घर की आ गई।' 
'हम क्या करें?' 
'यह दिन देखने के लिए क्या
 छोरे को जन्म दिया था?'
 दाएं बाएं से परिवार वालों से 
यह सब सुनने को मिलता था। 
तब पता लगा कि सपने 
और हकीकत में कितना 
फर्क होता है। 
प्यार मोहब्बत बेहतर जिंदगी 
सब अतीत की बातें थीं। 
घर भी तंग से बस दो ही कमरे थे । 
साथ में भैंस व बछिया का भी 
सहवास 24 घंटे का। 
समझ  सकता है कोई भी 
के दो कमरों में छह सात 
सदस्यों के परिवार का 
कैसे गुजारा होता है? 
कहां फुर्सत होती है एक दूसरे के लिए । 
चोरों की तरह मुलाकात होती हैं 
अपने ही घर में। 
बस जीवन तो घिसट रहा है हमारा। 
एक दिन सोचा इस नरक से 
कैसे छुटकारा मिले? 
मगर उसे ताश खेलने से फुर्सत 
कहां। 
घर खेत हाड़ तोड़ मेहनत 
और तान्ने । 
यही तो जिंदगी है हमारे जैसे 
करोड़ों युवक और युवतियों की 
भारत में। 
कभी-कभी जीवन लीला को 
खत्म करने का मन करता है । 
फिर ख्याल आता है कि 
इससे क्या होगा? 
किससे होगा? 
यही तो सवाल है सबसे बड़ा
 कि सही रास्ता क्या है?
दो चार दिन का रोना धोना
फिर खेल खत्म
और यह सिलसिला यूं ही 
चलता रहेगा
इस अंधेरे को कैसे खत्म  किया 
जाये?
कैसे रोशनी की किरण 
हम तक भी पहुंच सके
यही तो यक्ष प्रश्न है
बहुत बार सोचा 
कई बार सोचा है
मगर रास्ता नजर नहीं आता 
हमें 
बस इसी कामोकश में जीवन
किसी तरह गुजर रहा है हमारा
जीवन सरक रहा है हमारा
 रणबीर

*******
आपात स्थिति के आज हालत बने
फासीवाद से कब हमारी मुलाकात बने
और कोई चारा बचा नहीं लगता यारो
संभलो इससे पहले कि दिन रात बने।
मगर फासीवाद से लड़ना आसान कहां 
पहले समझें इसको फिर कोई बात बने।
बोले विरोध में तो एन आई ए आए
घर पर फिर संकट के हालत बने।
*******
गधे की तरह काम करवाया 
हाथ में चालीस रुपया पकड़ाया
पूरा दिन और इतने कम पैसे 
मजदूर ने मालिक से फरमाया
ठीक किया तुमने न्याय मांगा है
मैनेजर ने तुरत मैनेजर बुलवाया
पैसे वापिस लो इसी वक्त और
इसे 'घास डालो' का फरमान सुनाया
*******
मंदी के दौर में भी एक नया दौर लाएंगे।।  
आतंक का अंधेरा ये मिलकर के मिटाएंगे।। 
नएपन के नाम पर नंगापन छाता जा रहा है 
इंसानियत बाजार में हर एक होता जा रहा है  
परचम इंसानियत का हम फिर फैहराएंगे।। 
भीमकाय बाजार फिर संरक्षण मांग रहा है 
छिपा अपनी कमजोरी कर झूठा सॉन्ग रहा है 
जनता करे कंट्रोल बाजार ऐसा संसार रचाएंगे।। 
हाशिए पर फैंके गए जो उनका जमाना आएगा 
अपना हक पाने को नागरिक समाज बनाएगा 
बढ़े कदम नए साल में आगे बढ़ते जाएंगे।। 
नौजवानों का प्यार यहां फांसी चढ़ाया जाता है 
जात-पात गोत नात क्यों अपने रंग दिखाता है 
नए दौर की आशा से निराशा से लड़ पाएंगे।।
*******
किसी के कान में कही गई बात 
हजारों मील दूर तक सुनाई पड़ती है 
धीरे-धीरे बोल कोई सुन न ले 
गलत मत बोल कोई सुन न ले 
लेकिन फिर भी हर कोई सुन लेता है 
और वही राज की बात घूमती घूमती 
फिर आपके कानों में आ पड़ती है 
आप हैरान होते हैं कि यह कैसे हुआ 
इसे कहते हैं गॉशिप  या कहे चुगली 
जो आपसे गॉशिप करता है वह 
आपके बारे में भी गॉसिप करेगा।

*****
हरियाणा विकास
मॉडल बना है ये विकास में 
हरियाणा नम्बर वन हो रहा
कैसे बस कुछ ना पूछो भाई
पिछलों को सबको धो रहा
सब ही निडर घूम रहे हैं यहाँ
ये भ्रष्टाचार यहाँ से खो रहा 
शिक्षा ने उचाईयां छू ली हैं
बहुत उम्दा और कीमती है
जिसका भार गरीब ढो रहा
सेहत मान और पहलवान 
दुनिया में किया है गुनगान
भले अनीमिया और ज्यादा
गर्भवती औरत को डुबो रहा
हरियाणा नम्बर वन हो रहा 
फसल के दाम सबसे ज्यादा
मिलते हैं निठ्ठले किसान को
जमीन बेचो फायदा उठाओ
ये मंत्र दिया है हर इंसान को 
फिर भी क्यों किसान रो रहा
यह कोई नहीं जानता है कि
पिछले पांच साल के अन्दर
हमने विश्व बैंक से कितना 
लोन लिया है बताये तो कोई
बीएड कालेज धड़ाधड़ खुले
फीसें मनमर्जी की ली गयी
शिक्षक और छात्र भी बैठ के
कक्षा में रोज मजे से सो रहा

****
जिस्म में ताकत है हमारे यारो

सीनों में विरासत है हमारे यारो

फितरत में बगावत है हमारे यारो

समकतो.

काम में हिफाजत है हमारे यारो

पता तुम में हिमाकत है हमारे यारो

तुमसे ही आहत हैं हम हमारे यारो
****
याद तुम्हारी-साफगोई आती है यारो बेझिझकता तुम्हारा कद बढ़ाती है यारो तुम्हारी सलाह दिल में समाती है यारा समाज की उलभने सुलभाती है यारा
*****
आर्थिक मन्दी
आर्थिक मन्दी के दौर ने सताया हमको 
जेब ढीली कर दी इसने रुलाया हमको बहुत सी जगह इसने करतब दिखाए 
आई टी के कई योद्धा इसने मार गिराए सरकारी कंट्रोल भाता नाथा जिसको 
उसी से भीख मांगनी पड़ रही उनको 
पड़ सकता दिल पर बुरा असर बताया चिकित्सकों ने हाल में ऐसा भी फरमाया दिल के दौरे से कैसे आज बचा जाऐगा पूंजीवादी मंदी का दौर कहाँ पहुंचाएगा'
*****
छबके
छबके मारने ना आते तो आज तूं कामयाब नहीं 
बिना सिफारिस कहां नौकरी पूरा होवे ख्वाब नहीं 
छल कपट बिना होवे मानस का आज गुजारा ना 
बिना माला घालें कई हजार की नेता का सहारा ना 
भीतर काला बाहर सफेद‌ यो मुखौटा पहन लिया 
जिसके भीतर सफेद उसने ये कहर सहन किया 
सब कुछ बहग्या आज किसपै कोये यकीन करे
थोड़े घने बचे उनको ये सिस्टम घणा गमगीन करे 
बिना संघर्ष नहीं गुजारा रणबीर यो जान लियो 
मानवता एक दिन जीतैगी बात इतनी मान लियो ।।
*****
चरागे शाम
चरागे शाम ये जलाने का मौका आया यारो गरीब का घर बसाने का मौका आया यारो मंदी का दौर संकट है बेरोजगारी का देखो ये एकता पूरी दिखाने का मौका आया यारो 
ऐस का भार गरीबों पर बढ़ाया जा रहा क्यों अपना विरोध जताने का मौका आया यारो अब तक लूटा जिन्होंने मानवता को दोस्तो उसकी नींद उड़ाने का मौका आया यारो इश्क और पशुता में फर्क क्या होता है यही अब दुनिया की बताने का मौका आया यारो 

*****
नीतियों के वार
तुमने किया हर बार नीतियों से वार ये 
जख्में दिल दिये हैं हमको बार बार ये 
नए अंदाज और नए तरीके हैं तुम्हारे 
पहले तो धीभी थी तेज हुई रफ्तार ये।।
सत्यम बताओ उसके काले कारनामों पर जल्दी पर्दा डालो तुम कहती सरकार ये ।।
किसान की सब्सिडी पर डाका डाल रहे हैं आत्म हत्या कर रहा है उजड़ी बहार ये
रणबीर अब और क्या क्या गिनवाऊं मैं
पता है सारा इनको बनते हैं होशियार ये।।

*****
इंकलाब

मुझे इकलाब का मौसम लगा है तेरी आंखों में 
विश्वास है आगाज है और घटा है तेरी आंखों में 
न क्यों रस्क हो उस पर मुझे जिसने पैदा किया 
मुझे यह लगाने लगा कुछ जुदा है तेरी आंखों में 
तेरा साथ बहुत कुछ आज मायने रखता है यारो 
मेरे मकसद का एक आसरा दिखे तेरी आंखों मे 
नजर भर देख लेने से उमंगे झूम जाती हैं यारो 
आहवान का खास सिलसिला है तेरी आखों में 
रणबीर देख रहे हैं इन्कलाब जिंदाबाद का नारा 
सुबह और शाम कैसे झलकता है तेरी आंखों में.

16.1.2009.
***
लालच में तेरा सब कुछ रखो गया बंदे अकेलेपन का ठूंठ हरा हो गया बंदे 
अब दोस्तों को ढूंढ़ोगे यहां तुम यारो 
जिगरी था वो दोस्त तुम्हारा गया बंदे 
दया त्याग भानवता सब भुला दिए हैं 
उसे कैसे भुला दोगे जो चला गया बन्दे उसका वास्ता मत देना मक्कारो हमें 
वह भी तुम्हारे ही घर में सो गया बंदे 
गरीब हंस बोल लेता कभी कभी रोता 
वो आसुंओं से तेरा चेहरा धो गया बंदे।
****
बच्चे तरुण युवा लड़‌की रह पायें वो गांव कहाँ 
गाँव में बसेवा नहीं तो बताओ हम जायें कहां 
गांव नहीं गांव रहे ना शहर ही बन पाए गांव 
पहला उजड़ गया है नया नजर न आये गांव एक दूजे के कन्धों पर पैर रखते जा रहे देखो 
मानवता खोती जा रही काले बादल छाते  जा रहे देखो 
पैसा मंजिल बन गया बाजार यहां आया देखो 
खाओ पियो मौज करो नशा कैसा छाया देखो 
तुम्हें गैरो से कब फुरसत हरु ग़म से न खाली 
हमारी चाहत छोड़ के गैरौ से दोस्ती निभाली 
चलो आज की दुनिया में हमऑउट डेट हुए हमोर बंद दरवाजे हैं तुम्हारे खुले सब गेट हुए

******
यह तो कभी सोचा ही नहीं था 
दुश्मन से लड़ते लड़ते एक दिन 
हम खुद आपस में भिड़ जायेंगे 
हमारी कमजोरी या चाल उनकी 
क्या हम असलियत समझ पायेंगे 
सोचना बैठ कर ठण्डे दिमाग से 
कब कदम से कदम मिलायेंगे
****
"अमरीका के बारे में

 जानते हो?  
 साफ-सफाई है
 ऊंची ऊंची इमारते हैं
बिजली कभी गुरु रही होती 
काम करवाने का पैसा 
देना नही पड़ता है 
बहुत उन्नतशील है अमरीका 
पशुओं को गेहूं  खिलाता है 
फिर  पशुओं को खुद खाता है
छोटी मच्छलियों को पालता है
 फिर उन्हें बड़ी मच्छलियों को
 खिलाता है हंसते हंसते 
जब इससे भी काम नहीं चलता 
तो आतंक फैलाता है या फिर 
फैलवाता है 
युद्ध करता है युद्ध करवाता है 
हथियार दोनों को बेचता है
अमरीका 
उसे क्या  मां की कोख खाली 
होती है तो हो चाहे वह 
इस पार की मां है या उस पार की 
जैसे अब पाकिस्तान और 
 हिन्दुस्तान दोनों को बेच रहा है 
अपने हथियार अमरीका, 
अपने परांठे सेक रहा है 
अब पाकिस्तान हिन्दु‌स्तान 
लड़ें या न लड़ें उसने तो अपने 
हथियारों का सौदा कर ही लिया 
इसकी चाल समझना है मुश्किल
दिमाग हो तो समझें चाल हम
इसे तो गिरवी रख दिया हमने
अपने परम परमेश्वर भगवान 
के पास
आस्था सवाल नहीं चाहती
सोचना नहीं चाहती
मगर अपने तौर पर सोचना
एक न एक दिन पड़ेगा हम सबको
उस दिन अमरीका के बारे में 
बहुत जान चुके होंगे हम।

******
दूसरी दुनिया संभव है
सड़कों पर मजदूर आए थे
दूर दूर से पूरे भारत देश के
साथ ही बुद्धिजीवी भी आए थे
कोई इंजीनियर की डॉक्टर
कोई कोई समाज शास्त्री
'सब रंगीन का समावेश 
भारत देश हमारा देश '
' बिना महिला सहयोग के
हमारा विकास अधूरा है '
' साक्षरता हम वंचितों का
एक पैना हथियार है '
इन सब नारों की गूंज
सुनाई दी रांची शहर में
एक नई दुनिया की बात 
कार्यवतरह से की गई वहां
जहां गरीब अमीर की
जात गौत और नात की
नाबराबरी लिंग अनुपात की
जहां ऊंच और नीच की 
जहां ज्ञान के बंटवारे की
खान बीमारी के इलाज की
असमानताएं खत्म होती
जायें
मानव मानव की न चूसे 
जिस दुनिया में वह दुनिया
संभव है
हम सब की एकता के दम
इसे लड़कर हासिल किया
जा सकता है
लगता बड़ा आसान है 
मगर उतना ही मुश्किल
काम है यह.. कैसे
अमीर ने जाल फैलाया
परम्परा का इज्जत का 
जात पात और धर्म का
प्राचीन संस्कृति का
इस या उस मजहब का
और बांट कर रख दिया 
इस चाल को जिस दिन 
हम समझ गए तो
फिर दूसरी दुनिया का
सपना हमारा जल्दी 
बहुत ही जल्दी 
पूरा होगा जरूर
20.12.08
रांची

******
पिछले चार पांच साल से 
मौसम का मिजाज बदलता 
जा रहा है
इसका सबसे अधिक असर 
किसानों पर पड़ रहा है
सूखे के लंबे दौर
लगातार बाढ़, कम होती
यह अनियमित वर्षा 
भयानक ओलावृष्टि होना
टिड्डियां का अचानक हमला
किसानों की कमर तोड़ दी है
हालांकि सामुदायिक प्रयास 
रास्ता दिखा सकते हैं
मगर....
उनकी रक्षा के लिए सरकारी
समर्थन और संरक्षण बहुत
जरूरी है
इससे किसान बचेगा तो
उद्योग बचेगा
उद्योग बचेगा तो
भारत महान बचेगा....

********
*दो बेरोजगार (पति -पत्नी)
 बहुत आसान है मेरी जिंदगी की 
सटीक समीक्षा करना।  
बहुत आसान है मेरी जिंदगी की 
सही तरफदारी करना। 
बहुत आसान है मेरी जिंदगी के 
प्रति मन से करुणा  दिखाना । 
बहुत आसान है मेरी जिंदगी के प्रति 
असल में आंसू बहाना ।

मगर बहुत मुश्किल है 
मेरी जिंदगी जीना। 
स्कूल से आगे बढ़कर 
फिर कॉलेज में जाना होगा 
इसके सपने 
 बहुत बार देखे थे मैंने । 
कौन से कॉलेज में दाखिला हो 
कई बार सोचा था मैंने यह भी। 
एक साल पहले सोचना शुरू किया  कि 
पहले दिन का पहनावा 
क्या होगा 
मेरा कालेज में ? 
हेयर स्टाइल पर भी नजर डाली थी। 
सोचा क्या साइकिल पर ही मुझे 
कॉलेज जाना होगा हर रोज? 
या फिर घरवाले सेकंड हैंड 
स्कूटर का जुगाड़ कर देंगे। 

घर की हालत जुगाड़बाजी 
करने की भी कहां थी। 
यह बात नहीं मेरे भेजे के 
अंदर घुस रही थी। 
इसी उधेड़बुन में पूरा का पूरा दिन 
जुगाड़ बाजी के चक्कर में गुजर जाता। 
आखिर एक दिन 5 लोग आए थे 
हमारे घर में। 
उनकी बहुत आवभगत हुई थी। 
उन लोगों ने मेरे से भी पूछा- -
'बेटी कौन सी क्लास पास की है?' 
दूसरा सवाल था उनका -'कितने नंबर आए' 
मैंने धीमी से अपने नंबर बता दिए थे। 
उनकी नजरें मुझे घूरती 
सी महसूस हुई 
जैसे बकरे को उसके 
मारने से पहले कसाई 
उसे अपनी नजरों में से 
निकाल कर देखता है, 
उसी तरह का माहौल सा लगा मुझे । 
और इसके बाद कसाई 
बकरे को हलाल कर ही देता है। 
मुझे क्या पता था कि मेरा भी 
हलाल होने का वक्त आ गया है। 
और एक महीने के बाद ही 
मेरी शादी कर दी गई । 
एक और बेरोजगार के साथ ।

 2 बेरोजगारों की दुनिया के सपने क्या 
आप सोच सकते हो कि कैसे होंगे? 
हमने भी सोचने की कोशिश की थी 
खूब आगे का रास्ता देखने की। 

पर मैं नहीं देख पाई क्योंकि 
अंधेरे के सिवाय कुछ दिखाई 
नहीं दे रहा था । 
उनकी 2 एकड़ से भी कम जमीन थी। 
'भूखे घर की आ गई।' 
'हम क्या करें?' 
'यह दिन देखने के लिए क्या
 छोरे को जन्म दिया था?'
 दाएं बाएं से परिवार वालों से 
यह सब सुनने को मिलता था। 
तब पता लगा कि सपने 
और हकीकत में कितना 
फर्क होता है। 
प्यार मोहब्बत बेहतर जिंदगी 
सब अतीत की बातें थीं। 
घर भी तंग से बस दो ही कमरे थे । 
साथ में भैंस व बछिया का भी 
सहवास 24 घंटे का। 
समझ  सकता है कोई भी 
के दो कमरों में छह सात 
सदस्यों के परिवार का 
कैसे गुजारा होता है? 
कहां फुर्सत होती है एक दूसरे के लिए । 
चोरों की तरह मुलाकात होती हैं 
अपने ही घर में। 
बस जीवन तो घिसट रहा है हमारा। 
एक दिन सोचा इस नरक से 
कैसे छुटकारा मिले? 
मगर उसे ताश खेलने से फुर्सत 
कहां। 
घर खेत हाड़ तोड़ मेहनत 
और तान्ने । 
यही तो जिंदगी है हमारे जैसे 
करोड़ों युवक और युवतियों की 
भारत में। 
कभी-कभी जीवन लीला को 
खत्म करने का मन करता है । 
फिर ख्याल आता है कि 
इससे क्या होगा? 
किससे होगा? 
यही तो सवाल है सबसे बड़ा
 कि सही रास्ता क्या है?
दो चार दिन का रोना धोना
फिर खेल खत्म
और यह सिलसिला यूं ही 
चलता रहेगा
इस अंधेरे को कैसे खत्म  किया 
जाये?
कैसे रोशनी की किरण 
हम तक भी पहुंच सके
यही तो यक्ष प्रश्न है
बहुत बार सोचा 
कई बार सोचा है
मगर रास्ता नजर नहीं आता 
हमें 
बस इसी कामोकश में जीवन
किसी तरह गुजर रहा है हमारा
जीवन सरक रहा है हमारा
 रणबीर

*******
आपात स्थिति के आज हालत बने
फासीवाद से कब हमारी मुलाकात बने
और कोई चारा बचा नहीं लगता यारो
संभलो इससे पहले कि दिन रात बने।
मगर फासीवाद से लड़ना आसान कहां 
पहले समझें इसको फिर कोई बात बने।
बोले विरोध में तो एन आई ए आए
घर पर फिर संकट के हालत बने।
*******
गधे की तरह काम करवाया 
हाथ में चालीस रुपया पकड़ाया
पूरा दिन और इतने कम पैसे 
मजदूर ने मालिक से फरमाया
ठीक किया तुमने न्याय मांगा है
मैनेजर ने तुरत मैनेजर बुलवाया
पैसे वापिस लो इसी वक्त और
इसे 'घास डालो' का फरमान सुनाया
*******
मंदी के दौर में भी एक नया दौर लाएंगे।।  
आतंक का अंधेरा ये मिलकर के मिटाएंगे।। 
नएपन के नाम पर नंगापन छाता जा रहा है 
इंसानियत बाजार में हर एक होता जा रहा है  
परचम इंसानियत का हम फिर फैहराएंगे।। 
भीमकाय बाजार फिर संरक्षण मांग रहा है 
छिपा अपनी कमजोरी कर झूठा सॉन्ग रहा है 
जनता करे कंट्रोल बाजार ऐसा संसार रचाएंगे।। 
हाशिए पर फैंके गए जो उनका जमाना आएगा 
अपना हक पाने को नागरिक समाज बनाएगा 
बढ़े कदम नए साल में आगे बढ़ते जाएंगे।। 
नौजवानों का प्यार यहां फांसी चढ़ाया जाता है 
जात-पात गोत नात क्यों अपने रंग दिखाता है 
नए दौर की आशा से निराशा से लड़ पाएंगे।।
*******
किसी के कान में कही गई बात 
हजारों मील दूर तक सुनाई पड़ती है 
धीरे-धीरे बोल कोई सुन न ले 
गलत मत बोल कोई सुन न ले 
लेकिन फिर भी हर कोई सुन लेता है 
और वही राज की बात घूमती घूमती 
फिर आपके कानों में आ पड़ती है 
आप हैरान होते हैं कि यह कैसे हुआ 
इसे कहते हैं गॉशिप  या कहे चुगली 
जो आपसे गॉशिप करता है वह 
आपके बारे में भी गॉसिप करेगा।

*****
हरियाणा विकास
मॉडल बना है ये विकास में 
हरियाणा नम्बर वन हो रहा
कैसे बस कुछ ना पूछो भाई
पिछलों को सबको धो रहा
सब ही निडर घूम रहे हैं यहाँ
ये भ्रष्टाचार यहाँ से खो रहा 
शिक्षा ने उचाईयां छू ली हैं
बहुत उम्दा और कीमती है
जिसका भार गरीब ढो रहा
सेहत मान और पहलवान 
दुनिया में किया है गुनगान
भले अनीमिया और ज्यादा
गर्भवती औरत को डुबो रहा
हरियाणा नम्बर वन हो रहा 
फसल के दाम सबसे ज्यादा
मिलते हैं निठ्ठले किसान को
जमीन बेचो फायदा उठाओ
ये मंत्र दिया है हर इंसान को 
फिर भी क्यों किसान रो रहा
यह कोई नहीं जानता है कि
पिछले पांच साल के अन्दर
हमने विश्व बैंक से कितना 
लोन लिया है बताये तो कोई
बीएड कालेज धड़ाधड़ खुले
फीसें मनमर्जी की ली गयी
शिक्षक और छात्र भी बैठ के
कक्षा में रोज मजे से सो रहा
*****

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें