गुरुवार, 7 नवंबर 2019

कार्ल मार्क्स का जन्म

कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को ट्रीव्ज में हुआ था। उनके पिता स्थानीय अदालत में एक प्रमुख यहूदी वकील और पब्लिक नोटरी थे। वे एक प्रतिभा के धनी, उच्च-शिक्षा प्राप्त और 18वीं शताब्दी के प्ऱफांस के प्रगतिशील विचारों से ओतप्रोत व्यक्ति थे। 1824 में प्रशाई के एक सरकारी फरमान के अनुसार सारे यहूदियों के लिए बपतिस्मा करवाना ;ईसाई बनना; अनिवार्य कर दिया गया और इस फरमान के उल्लंघन का दण्ड था सारे राजकीय पदों/हैसियतों से हाथ धो बैठना। एक स्वतन्त्रा चिन्तक और वाल्तेयर के अनुयायी होते हुए भी मार्क्स के पिता ने अपना व्यवसाय छोड़ने और इस तरह अपने परिवार को बरबाद करने की अपेक्षा फरमान के आगे समर्पण करने का रास्ता चुना। कार्ल मार्क्स की माँ हंगेरियन मूल की एक डच यहूदी महिला थीं जिनके पूर्वज यहूदी धर्मगुरु हुआ करते थे।
         कम उम्र में ही कार्ल मार्क्स की प्रखर बौद्धिक सम्भावनाएँ ज़ाहिर हो गयी थीं और सौभाग्य से उनके माता-पिता उनके सांस्कृतिक विकास के लिए सभी प्रोत्साहन और अवसर उपलब्ध कराने में समर्थ थे। उनके पिता ने उन्हें रेसिन और वाल्तेयर पढ़कर सुनाये और कम उम्र में ही फ्रांसीसी  गौरव-ग्रन्थों से परिचित करा दिया|  और दूसरी ओर उनकी भावी पत्नी के पिता लुडविग वॉन वेस्टपफालेन के घर पर उन्होंने होमर और शेक्सपियर से प्यार करना सीखा। श्रमजीवी वर्ग के प्रति उनकी गहरी हमदर्दी, और उनका क्रान्तिकारी उत्साह पूर्णतया तर्क, अन्तर्दृष्टि और अध्ययन पर आधारित थे न कि कोरी भावुकता, वर्गीय संस्कारों या व्यक्तिगत दुखों-कष्टों पर। फिर भी वे कोई भावनाविहीन दार्शनिक, रूखे वैज्ञानिक, या इतिहास की चीर-फाड़ करने वाले निर्लिप्त अध्येता मात्र तो नहीं ही थे। उनके सभी निजी मित्र और उनका अपना जीवन इस बात का प्रमाण देते हैं कि वे अपने
समकालीन डार्विन की भाँति एक विशेषज्ञ भर नहीं थे, अपितु प्रखर प्रतिभाशाली होने के साथ ही साथ मानवीय प्यार, जोश, और कमजोरियों से भरपूर एक सम्पूर्ण मनुष्य थे। एक रोचक तथ्य यह भी है कि उनके प्रारम्भिक साहित्यिक प्रयास कविता के क्षेत्र में थे।

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