विवाह
लगभग उसी समय मार्क्स ने अपनी सखी और बचपन और युवावस्था की साथी, जेनी वोन वेस्टपफालेन से शादी कर ली जो कि ख़ुद भी बहुत ही बुद्धिमती और सुशिक्षित महिला थीं। मार्क्स को उनसे बेहतर जीवनसाथी मिल ही नहीं सकता था। विवाह के दिन से अपनी मृत्यु के दिन तक वे अपने पति के सारे सुख-दुख, सारी आशाओं-आकांक्षाओं की सहभागी रहीं। वे दोनों एक-दूसरे के लिए समर्पित थे। मेहरिंग के कथनानुसार इस घोर नास्तिक और कम्युनिस्ट के एक कट्टर विरोधी ने भी इस विवाह को ईश्वर द्वारा नियोजित बताया था।
लगभग उसी समय मार्क्स ने अपनी सखी और बचपन और युवावस्था की साथी, जेनी वोन वेस्टपफालेन से शादी कर ली जो कि ख़ुद भी बहुत ही बुद्धिमती और सुशिक्षित महिला थीं। मार्क्स को उनसे बेहतर जीवनसाथी मिल ही नहीं सकता था। विवाह के दिन से अपनी मृत्यु के दिन तक वे अपने पति के सारे सुख-दुख, सारी आशाओं-आकांक्षाओं की सहभागी रहीं। वे दोनों एक-दूसरे के लिए समर्पित थे। मेहरिंग के कथनानुसार इस घोर नास्तिक और कम्युनिस्ट के एक कट्टर विरोधी ने भी इस विवाह को ईश्वर द्वारा नियोजित बताया था।
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